हर साल सैकड़ों फिल्में बनती हैं. कुछ रिलीज के कुछ दिनों बाद ही लोगों की यादों से गायब हो जाती हैं, जबकि कुछ ऐसी होती हैं जिनका नाम दशकों बाद भी उसी सम्मान के साथ लिया जाता है. साल 1982 में रिलीज हुई 'गांधी' ऐसी ही एक फिल्म थी. इस फिल्म को पर्दे तक पहुंचाने में करीब 20 साल लग गए, लेकिन इंतजार बेकार नहीं गया. रिलीज के बाद फिल्म ने न सिर्फ दुनिया भर में शानदार कमाई की, बल्कि ऑस्कर अवॉर्ड्स में भी ऐसा इतिहास रचा, जिसकी चर्चा आज भी होती है. खास बात यह है कि यह एक ब्रिटिश-इंडियन प्रोडक्शन थी, लेकिन इसमें कई भारतीय कलाकारों ने अहम भूमिकाएं निभाईं.
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'गांधी' का निर्देशन मशहूर फिल्ममेकर रिचर्ड एटनबरो ने किया था. महात्मा गांधी के जीवन को बड़े पर्दे पर उतारने का सपना उन्होंने कई साल पहले देखा था. इस प्रोजेक्ट को पूरा करने में फंडिंग से लेकर रिसर्च और प्रोडक्शन तक कई चुनौतियां आईं. यही वजह रही कि फिल्म को बनने में करीब दो दशक का समय लग गया.
बेन किंग्सले बन गए थे गांधी
फिल्म में महात्मा गांधी का किरदार बेन किंग्सले ने निभाया था. उनकी एक्टिंग को दुनियाभर में खूब सराहा गया और इसी भूमिका के लिए उन्हें बेस्ट एक्टर का ऑस्कर भी मिला. वहीं फिल्म में रोहिणी हट्टंगड़ी ने कस्तूरबा गांधी का किरदार निभाया था. इसके अलावा सईद जाफरी, रोशन सेठ, ओम पुरी और अमरीश पुरी जैसे कई भारतीय कलाकार भी फिल्म का हिस्सा थे. गांधी फिल्म की शूटिंग 31 जनवरी 1981 को दिल्ली में हुई. जब 33 साल बाद जब गांधी जी का असली अंतिम संस्कार हुआ था.इस अंतिम संस्कार में 200,000 से ज्यादा स्वयंसेवकों ने हिस्सा लिया. इसी दौरान गांधी टीम ने 94,560 लोगों को अपने पैसे पर खर्च कर भीड़ का हिस्सा बनाया. इस सीन की शूट करते हुए एक्टर बेन किंग्सले, जिन्होंने गांधी जी का किरदार निभाए, चुपचाप रहे, जबकि लोगों की भीड़ उनके आसपास चलती.
11 नॉमिनेशन, 8 ऑस्कर और दुनिया भर में कमाई
1983 के ऑस्कर अवॉर्ड्स में 'गांधी' को 11 कैटेगरी में नॉमिनेशन मिला था. इनमें से फिल्म ने 8 ऑस्कर अपने नाम किए. इसे बेस्ट पिक्चर, बेस्ट डायरेक्टर, बेस्ट एक्टर समेत कई बड़े अवॉर्ड मिले. करीब 183 करोड़ रुपये के बजट में बनी इस फिल्म ने दुनिया भर में लगभग 1050 करोड़ रुपये के बराबर कारोबार किया था.
'गांधी' सिर्फ एक सफल फिल्म नहीं थी, बल्कि यह उन फिल्मों में शामिल है जिन्होंने भारतीय इतिहास को दुनिया के सामने बड़े पैमाने पर पहुंचाया. शानदार एक्टिंग, दमदार कहानी और बेहतरीन निर्देशन की वजह से यह आज भी क्लासिक फिल्मों की सूची में गिनी जाती है. यही वजह है कि रिलीज के चार दशक बाद भी इस फिल्म का नाम सिनेमा के इतिहास में सम्मान के साथ लिया जाता है.