शोले का वो एक्टर जिसने 10वीं में ही कर लिया था एक्टर बनने का फैसला, हर शुक्रवार जाता था पुणे से मुंबई, फिर एक रोल ने बदल दी किस्मत

हिंदी सिनेमा में कई ऐसे कलाकार हुए हैं, जिन्होंने अपनी अदाकारी से दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई. इनमें एक नाम गोवर्धन कुमार असरानी का भी है, जिन्हें दुनिया असरानी के नाम से जानती है.

विज्ञापन
Read Time: 4 mins
शोले का वो एक्टर जिसने 10वीं में ही कर लिया था एक्टर बनने का फैसला
NDTV

हिंदी सिनेमा में कई ऐसे कलाकार हुए हैं, जिन्होंने अपनी अदाकारी से दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई. इनमें एक नाम गोवर्धन कुमार असरानी का भी है, जिन्हें दुनिया असरानी के नाम से जानती है. उन्होंने अपनी शानदार कॉमिक टाइमिंग, चेहरे के अनोखे हाव-भाव और मजेदार डायलॉग बोलने के अंदाज से लोगों को खूब हंसाया. उन्होंने अपने करियर में कई तरह के किरदार निभाए, लेकिन फिल्म 'शोले' के अंग्रेजों के जमाने के जेलर के रूप में उनकी पहचान कुछ ऐसी बनी कि आज भी उनका नाम आते ही यह किरदार याद आ जाता है. 20 अक्टूबर 2025 को 84 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कहने वाले असरानी आज भी दर्शकों की यादों में जिंदा हैं.

10वीं में सोच लिया था एक्टर बनने का

असरानी का जन्म 1 जनवरी 1941 को राजस्थान के जयपुर में एक सिंधी-हिंदू परिवार में हुआ था. उनके पिता का कालीन और साड़ियों का कारोबार था. परिवार चाहता था कि वह पढ़ाई पूरी करके कारोबार में हाथ बटाएं, लेकिन असरानी की दिलचस्पी अभिनय और संगीत में थी. आठ भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर आने वाले असरानी स्कूल के दिनों से ही नाटकों में हिस्सा लेते थे. उन्होंने ऑल इंडिया रेडियो, जयपुर के कार्यक्रमों में भी भाग लिया और धीरे-धीरे अभिनय के प्रति उनका लगाव बढ़ता गया.

मैट्रिक की पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने अभिनेता बनने का सपना देखना शुरू कर दिया था. इसी सपने को पूरा करने के लिए वह मुंबई भी पहुंचे, लेकिन शुरुआती दिनों में उन्हें सही दिशा नहीं मिल पाई और वह वापस जयपुर लौट आए. हालांकि, उन्होंने अपने सपने को छोड़ा नहीं. कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने पुणे के फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एफटीआईआई) में दाखिला लिया और अभिनय की बारीकियां सीखीं.

हर शुक्रवार पुणे से मुंबई जाते

असरानी के लिए फिल्मी दुनिया में जगह बनाना आसान नहीं था. अभिनय की पढ़ाई पूरी करने के बाद वह हर शुक्रवार पुणे से मुंबई जाते, फिल्म निर्माताओं से मिलते और काम मिलने की उम्मीद लेकर लौट आते.

Advertisement

शुरुआत में उन्हें छोटे-छोटे किरदार मिले, लेकिन उन्होंने हर भूमिका को पूरी मेहनत और ईमानदारी से निभाया. धीरे-धीरे उनकी प्रतिभा लोगों की नजरों में आने लगी. 'गुड्डी', 'बावर्ची', 'नमक हराम', 'अभिमान' और 'चुपके चुपके' जैसी फिल्मों में उन्होंने अपने अभिनय से अलग पहचान बनाई. इन फिल्मों में उन्होंने साबित किया कि किसी किरदार को यादगार बनाने के लिए उसका बड़ा होना जरूरी नहीं, बल्कि उसे निभाने का अंदाज मायने रखता है.

फिल्म 'आज की ताजा खबर' में उनके शानदार अभिनय के लिए उन्हें फिल्मफेयर का सर्वश्रेष्ठ हास्य अभिनेता का पुरस्कार भी मिला. इसके अलावा, 'रफूचक्कर', 'बालिका वधू' और 'पति पत्नी और वो' जैसी फिल्मों में भी उनकी कॉमेडी दर्शकों को खूब पसंद आई.

Advertisement

शोले ने बदली किस्मत

असरानी के करियर का सबसे यादगार किरदार 1975 में आई फिल्म 'शोले' का जेलर था. फिल्म में उनका डायलॉग, 'हम अंग्रेजों के जमाने के जेलर हैं', आज भी लोगों की जुबान पर है. इस किरदार में वह खुद को बेहद चालाक और ताकतवर समझने वाले जेलर के रूप में नजर आए, लेकिन उनकी हरकतें दर्शकों को हंसने पर मजबूर कर देती थीं. 

फिल्म में उनका किरदार भले ही छोटा था, लेकिन उन्होंने अपनी अदाकारी से ऐसी छाप छोड़ी कि वह हिंदी सिनेमा के सबसे चर्चित कॉमिक किरदारों में शामिल हो गया.

यह भी पढ़ें | 50 साल के करियर में इस एक्टर ने दी 180 फ्लॉप, 270 फिल्मों में किया काम, एक ब्लॉकबस्टर ने बना दिया सुपरस्टार

Featured Video Of The Day
पवन सिंह ने अक्षरा सिंह और उनके माता-पिता से मांगी माफी
Topics mentioned in this article
Asrani
Asrani Actor
Asrani Comedian
Sholay
Sholay  cast

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं