सेना में हुआ रिजेक्ट, तो बन गया दर्जी, 20 की उम्र में उठाई पत्नी की अर्थी, फिर सिनेमा में हुई एंट्री और बन गया कॉमेडी का बाप

यह एक्टर उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर के छोटे से शहर कुलारा से ताल्लुक रखता था. फिल्म इंडस्ट्री में एक लोकप्रिय अभिनेता बनने से पहले, उन्होंने एक दर्जी के रूप में काम किया. आजकल यह काफी चर्चा में हैं.

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फोटो में दिख रहा लड़का आज है स्टार

कई बॉलीवुड अभिनेताओं ने स्टारडम तक पहुंचने से पहले एक साधारण शुरुआत की थी. जैसे साउथ के सुपरस्टार रजनीकांत ने बस कंडक्टर के रूप में काम किया, दिग्गज देव आनंद फेमस होने से पहले एक क्लर्क थे. ऐसा ही एक एक्टर है, जो आज घर-घर में जाना जाता है, लेकिन कभी उन्होंने भी दर-दर की ठोकरे खाई हैं. यह एक्टर उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर के छोटे से शहर कुलारा से ताल्लुक रखता था. फिल्म इंडस्ट्री में एक लोकप्रिय अभिनेता बनने से पहले, उन्होंने एक दर्जी के रूप में काम किया. हालांकि उन्होंने सेना में शामिल होने का सपना देखा था, लेकिन उनकी लंबाई के कारण उन्हें रिजेक्ट कर दिया गया था. जब उन्होंने अपनी पहली नौकरी शुरू की, तो उनके परिवार ने 1991 में उनकी अरेंज मैरिज कर दी. लेकिन ये शादी उनके लिए एक बड़ा सदमा बन गई. हम बात कर रहे एक्टर राजपाल यादव की.

बेटी को जन्म देते छोड़ गई पत्नी

राजपाल यादव अपनी बेहतरीन कॉमिक टाइमिंग और कैरेक्टर रोल्स के लिए जाने जाते हैं. लेकिन सफलता का स्वाद चखने के लिए उन्हें बहुत संघर्ष करना पड़ा. शुरुआत में उनकी लंबाई के लिए उनकी आलोचना की गई थी, लेकिन उन्होंने अपनी प्रतिभा और अपने काम के प्रति समर्पण के साथ इस पर काबू पा लिया. एक पुराने इंटरव्यू में, राजपाल ने बताया कि कैसे उन्हें अपनी शादी के तुरंत बाद अपनी पत्नी के शव को अपने कंधे पर ढोना पड़ा था.

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राजपाल ने लल्लनटॉप से इंटरव्यू के दौरान बताया, "उस समय, अगर आप 20 साल के नौकरीपेशा व्यक्ति होते, तो परिवार वाले आपकी शादी करवाने के लिए दौड़ पड़ते. मेरे पिता ने मेरी शादी तय की. मेरी पहली पत्नी ने एक बच्ची को जन्म दिया था, तभी उसकी मौत हो गई. मुझे अगले दिन उससे मिलना था, लेकिन इसके बजाय, मैंने खुद को उसकी लाश को उठाते हुए पाया. सौभाग्य से, मेरे परिवार- मेरी मां और भाभी ने सुनिश्चित किया कि मेरी बेटी को कभी भी अपनी मां की कमी महसूस न हो. वह प्यार से घिरी हुई बड़ी हुई."

इस फिल्म से बदला करियर

इस सदमे के बाद राजपाल ने अपने एक्टिंग करियर पर फोकस किया और नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा चले गए. हालांकि उनकी पहली फिल्म दिल क्या करे पर किसी का ध्यान नहीं गया, लेकिन राम गोपाल वर्मा की जंगल (2000) में उनकी परफॉर्मेंस ने उनके सफल अभिनय करियर की शुरुआत की. उन्हें प्रियदर्शन की हंगामा में एक सफल भूमिका मिली, और तब से उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा. पिछले कुछ सालों में, उन्होंने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में एक कॉमेडी स्टार के रूप में अपनी जगह बनाई.

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