रणवीर सिंह ने फरहान अख्तर की फिल्म डॉन-3 से हाथ खींचे तो मामला गर्म हो गया. फिल्म मेकर्स ने FWICE का दरवाजा खटखटाया. FWICE ने मामला सुलझाने की कोशिश की लेकिन जब रणवीर सिंह की तरफ से कोई जवाब नहीं मिला तो उन्होंने एक्टर के खिलाफ non-cooperation directive जारी किया. ये विवाद अब कोर्ट तक पहुंच गया है. इंडियन मोशन पिक्चर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (IMPPA) के पूर्व अध्यक्ष और जाने-माने फिल्म प्रोड्यूसर टी.पी.अग्रवाल ने दिंडोशी की बॉम्बे सिविल कोर्ट में एक याचिका दायर करके FWICE के इस कदम को चुनौती दी है.
FWICE ने जो किया गलत किया!
FWICE और IMPPA दोनों के खिलाफ दायर अपनी याचिका में अग्रवाल ने यह तर्क दिया है कि किसी भी व्यक्ति, संगठन या ट्रेड बॉडी के पास किसी पर बैन लगाने या दूसरों को किसी के साथ काम करने से मना करने का निर्देश देने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है. NDTV के साथ एक खास बातचीत में अग्रवाल ने FWICE के इस निर्देश की कड़ी आलोचना करते हुए इसे फेडरेशन के अधिकार क्षेत्र से बाहर बताया.
उन्होंने कहा, "FWICE ने जो कुछ भी किया है वह पूरी तरह से गलत है और उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता. यह ऐसा काम नहीं है जिसे वे कर सकें. हम 2017 में कॉम्पिटिशन कमीशन (CCI) के पास गए थे और कोर्ट ने भी यह फैसला दिया था कि वे ऐसा नहीं कर सकते, क्योंकि यह उनके अधिकारों के दायरे में नहीं आता."
पहले भी हुए हैं ऐसे विवाद
अग्रवाल ने याद दिलाया कि पहले भी इसी तरह के विवाद सामने आ चुके हैं. उन्होंने आगे कहा, "यह फेडरेशन के अधिकारों से जुड़ा मामला था. उस समय भी उन्होंने प्रोड्यूसर्स के लिए काफी मुश्किलें खड़ी की थीं. उस समय मैं IMPPA का अध्यक्ष था."
यह कानूनी विवाद FWICE के उस हालिया 'नॉन कोऑपरेटिव' डायरेक्टिव से शुरू हुआ है जो रणवीर सिंह के खिलाफ जारी किया गया था. यह निर्देश तब आया जब 'डॉन 3' के प्रोड्यूसर्स, एक्सेल एंटरटेनमेंट ने कथित तौर पर फिल्म से एक्टर के बाहर होने के बाद होने वाले नुकसान और शूटिंग के शेड्यूल में आने वाली रुकावटों को लेकर चिंता जताई थी.
फरहान अख्तर को कोर्ट जाना चाहिए था
जब NDTV ने अग्रवाल से पूछा कि क्या एक्सेल एंटरटेनमेंट के फरहान अख्तर और रितेश सिधवानी ने FWICE से संपर्क करके सही कदम उठाया था, तो अग्रवाल ने कहा कि इस मामले को कोर्ट में ले जाना चाहिए था. उन्होंने कहा, "वे कोर्ट जा सकते थे. यह एक कानूनी मामला है. FWICE के पास इस मामले में कोई अधिकार नहीं है."
अग्रवाल ने आगे बताया कि प्रोड्यूसर्स से यह उम्मीद की जाती है कि वे सबसे पहले अपनी इंडस्ट्री से जुड़े संगठनों (एसोसिएशन्स) से संपर्क करें. उन्होंने कहा, “अगर किसी प्रोड्यूसर के साथ ऐसी कोई बात होती है तो वे अपने ही एसोसिएशन के पास जाते हैं. वे FWICE के पास नहीं जाते. उन्हें IMPPA या जिस भी एसोसिएशन से वे जुड़े हैं, उसके पास जाना चाहिए. वह एसोसिएशन उन लोगों को बुलाएगा और मामले को समझने और सुलझाने की कोशिश करेगा. अगर मामला नहीं सुलझता तो सबसे अच्छा तरीका है कि कोर्ट जाया जाए.”
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उन्होंने यह भी बताया कि अपनी याचिका में उन्होंने IMPPA को एक पक्ष क्यों बनाया है. उन्होंने कहा, “मैंने IMPPA को भी एक पक्ष इसलिए बनाया है, क्योंकि IMPPA ने इस मुद्दे को क्यों नहीं उठाया? उन्होंने दखल क्यों नहीं दिया? सब लोग चुप क्यों हैं और FWICE जो कर रहा है, उसी के साथ क्यों चल रहे हैं?”
हालांकि अब वे IMPPA के प्रेसिडेंट नहीं हैं फिर भी अग्रवाल ने कहा कि IMPPA और फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया, दोनों के संरक्षक (Patron) के तौर पर उनकी मौजूदा भूमिका के चलते वे कानूनी दखल दे सकते हैं. उन्होंने कहा, “अब मैं IMPPA का प्रेसिडेंट नहीं हूं. मैं IMPPA का संरक्षक हूं और साथ ही फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया का भी संरक्षक हूं. इसलिए मैंने फैसला किया कि मुझे कोर्ट जाना चाहिए, ताकि किसी भी एसोसिएशन के पास किसी को ब्लैकमेल करने का यह अधिकार न हो.”
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