43 साल पहले इस फिल्म ने बदल दी थी हर मां-बाप की सोच, बदल दी थी अपनी वसीयत, बच्चों से छीन लिया था मालिकाना हक

आज हम आपको बॉलीवुड की एक ऐसी फिल्म से रूबरू करवाते हैं, जिसे देखने के बाद हर मां-बाप ने ऐसा फैसला लिया, जो औलाद सपने में भी नहीं सोच सकती है.

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43 साल पहले इस फिल्म ने बदल दी थी हर मां-बाप की सोच
नई दिल्ली:

बॉलीवुड में कुछ फिल्में ऐसी रही हैं, जिन्होंने सामाजिक तौर पर कई तरह से मैसेज दिए. इतना ही नहीं फिल्मों को देख लोगों की सोच तक बदल डाली. आज हम आपको बॉलीवुड की एक ऐसी फिल्म से रूबरू करवाते हैं, जिसे देखने के बाद हर मां-बाप ने ऐसा फैसला लिया, जो औलाद सपने में भी नहीं सोच सकती है. हम बात कर रहे हैं फिल्म अवतार की. राजेश खन्ना की यह फिल्म 1983 में रिलीज हुई थी. फिल्म अवतार ने दर्शकों के दिलों पर गहरा असर छोड़ा. 

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क्या का फिल्म की कहानी

फिल्म राजेश खन्ना ने इसमें अवतार किशन का किरदार निभाया, जबकि शबाना आजमी ने उनकी पत्नी राधा किशन की भूमिका निभाई. मोहन कुमार द्वारा निर्देशित यह फिल्म परिवार के रिश्तों और बुढ़ापे में माता-पिता के साथ बच्चों के व्यवहार की कड़वी सच्चाई दिखाती है.कहानी में अवतार किशन अपनी मेहनत से परिवार चलाता है और बच्चों की अच्छी परवरिश करता है. वह गरीबी में भी बेटों को पढ़ाई-लिखाई करवाता है और उन्हें अच्छी जिंदगी देता है. लेकिन जैसे ही बच्चे बड़े होते हैं और अपनी जिंदगी बसाते हैं, वह माता-पिता को भूल जाते हैं. बुढ़ापे में उन्हें घर से अलग-थलग कर दिया जाता है. बच्चे स्वार्थी बन जाते हैं और माता-पिता के साथ बुरा सलूक करते हैं. फिल्म दिखाती है कि अवतार किशन हार नहीं मानता्, फिर से मेहनत करता है, सफलता हासिल करते हैं और अपनी जिंदगी खुद संवार लेता है.

अवतार का परिणाम

इस फिल्म का प्रभाव इतना जबरदस्त था कि भारत में कई बुजुर्ग दंपतियों की सोच पूरी तरह बदल गई. उन्हें डर सताने लगा कि कहीं उनके बच्चे भी फिल्म की तरह उनके साथ वैसा ही बर्ताव न करें. नतीजा यह हुआ कि बहुत से माता-पिता ने अपनी वसीयत में बदलाव कर दिया. जो संपत्ति या मकान उन्होंने पहले बच्चों के नाम कर दिए थे, उसे वापस अपने नाम कर लिया. वे नहीं चाहते थे कि बुढ़ापे में अकेले पड़ जाएं या संपत्ति के लालच में उनके साथ अन्याय हो. अवतार ने सिर्फ मनोरंजन नहीं किया, बल्कि समाज को एक बड़ा सबक भी दिया. यह फिल्म बताती है कि माता-पिता का त्याग और प्यार अनमोल है. बच्चों को उनका सम्मान करना चाहिए और अच्छा व्यवहार रखना चाहिए. रिश्ते प्यार, विश्वास और देखभाल पर टिकते हैं, न कि सिर्फ संपत्ति पर. आज भी यह फिल्म परिवार के मूल्यों की याद दिलाती है.
 

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