सिनेमा के शोमैन राज कपूर ने अपने करियर में एक से बढ़कर एक हिट फिल्में दीं. इन्हीं में से एक है 1982 में आई फिल्म प्रेम रोग. इस रोमांटिक ड्रामा फिल्म का निर्देशन और निर्माण राज कपूर ने किया था और पटकथा जैनेंद्र जैन और कामना चंद्र ने लिखी थी. फिल्म में ऋषि कपूर कपूर लीड रोल में हैं, जो एक विधवा ( पद्मिनी कोल्हापुरे ) के से प्रेम करते हैं. 30 जुलाई 1982 को रिलीज हुई यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट हुई. 30वें फिल्मफेयर पुरस्कारों में फिल्म को सर्वश्रेष्ठ फिल्म , सर्वश्रेष्ठ अभिनेता (ऋषि), सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री ( नंदा ) और सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशक (लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल) सहित 12 प्रमुख नामांकन प्राप्त हुए. इसे राज कपूर, ऋषि कपूर और पद्मिनी कोल्हापुरे के करियर के सर्वश्रेष्ठ फिल्म माना जाता है.
क्या है कहानी
देवधर एक गरीब अनाथ है, जो बचपन में मनोरमा से प्रेम करने लगा था. मनोरमा, धनी और शक्तिशाली बड़े ठाकुर की इकलौती भतीजी और वीरेंद्र सिंह (छोटे ठाकुर के नाम से मशहूर) की बेटी है. दयालु ठाकुर ने देवधर को उच्च शिक्षा के लिए शहर जाने में मदद की. आठ साल बाद देवधर अपने गांव लौटता है, जहां वह मनोरमा को युवावस्था में पाता है. उसे दोबारा देखकर देवधर को उससे प्रेम हो जाता है और उसे उम्मीद होती है कि मनोरमा भी उससे प्रेम करती है. लेकिन मनोरमा उसके प्रेम का जवाब नहीं देती. जिस दिन देवधर बड़े ठाकुर से मनोरमा का हाथ मांगने का इरादा करता है, जिसे वह गांव के सभी बुजुर्गों में सबसे उदार मानता है. उसी दिन उसकी मुलाकात मनोरमा के भावी दूल्हे कुंवर नरेंद्र प्रताप सिंह से होती है, जो न केवल मनोरमा के परिवार से अधिक धनी है, बल्कि मनोरमा भी उस पर मोहित हो जाती है. देवधर अपने दिल की बात नहीं कहता और उसकी इस परेशानी के बारे में केवल उसकी चचेरी बहन राधा और मनोरमा की छोटी मां को पता चलता है.
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कुंवर नरेंद्र प्रताप सिंह मनोरमा से बेहद प्यार करते थे. हालांकि, शादी के तीन दिन बाद ही एक सड़क दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो जाती है. घर पर छोटी मां और बड़े ठाकुर के विरोध के बावजूद मनोरमा का मुंडन कराने की तैयारी चल रही है, तभी कुंवर नरेंद्र प्रताप सिंह की भाभी राज रानी बीच में आती हैं और मनोरमा को अपने साथ ले जाती हैं. राज रानी और उनके बेटे की मदद से मनोरमा धीरे-धीरे अपने जीवन को फिर से संवारने की कोशिश करती हैं. एक दिन, उनके देवर राजा वीरेंद्र प्रताप सिंह द्वारा रेप किए जाने के बाद वह अपने मायके लौट आती हैं. जब देवधर को इस स्थिति का पता चलता है, तो वह मनोरमा के जीवन को फिर से संवारने और उनके चेहरे पर मुस्कान लाने की कोशिश करता है. देवधर जीवन और प्रेम में मनोरमा का विश्वास फिर से जगाने के लिए दृढ़ संकल्पित है. ऐसा करने में अंततः उसे शक्तिशाली ठाकुर के क्रोध का सामना करना पड़ता है, जो पुरानी परंपराओं और रीति-रिवाजों वाले व्यक्ति हैं.
मनोरमा विधवा होने के बाद हुई घटनाओं के बारे में अपनी मां को सब कुछ बता देती है. उसके देवर और पिता दोनों ही देवधर के साथ उसके प्रेम प्रसंग से क्रोधित हैं और देवधर को जान से मारने और उसे वापस ससुराल भेजने की कसम खाते हैं. गांव में झगड़ा शुरू हो जाता है और अंत में दोनों फिर से मिल जाते हैं.
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फिल्म के गाने
राजकपूर गीत संगीत की अच्छी समझ थी. कहानी के अलावा गाने उनकी फिल्मों की जान होती थी. फिल्म में संगीत लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने तैयार किया था. वहीं गीत तीन अलग अलग गीतकारों ने लिखा था. संतोष आनंद ने 4 गाना, आमिर कजलबश 1 गाना और पंडित नरेंद्र शर्मा ने 1 गाना लिखा था. बॉक्स ऑफिस इंडिया के अनुसार , फिल्म का साउंडट्रैक 1980 के दशक के सबसे अधिक बिकने वाले हिंदी फिल्म एल्बमों में से एक था. इसके गाने, जैसे "मैं हूं प्रेम रोगी" और "मोहब्बत है क्या चीज", उस वर्ष संगीत चार्ट पर छाए रहे.