70s का वो राम भजन गाना जो दशहरा पर जरूर सुनें, 4 भाइयों ने मिलकर गाया, शर्मा बंधुओं की आवाज ने बना दिया अमर

70s का वो राम भजन जो हर दशहरा पर हो जाता है वायरल. शर्मा बंधु की आवाज ने इसे बनाया अमर. जयदेव के म्यूजिक और चार भाइयों का ये राम भजन जीवन का बड़ा संदेश आसान भाषा में देता है.

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70s का वो राम भजन जो हर दशहरा पर होने लगता है वायरल, शर्मा बंधुओं ने बनाया अमर
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हिंदी सिनेमा में कुछ ऐसे गीत हैं, जो मनोरंजन से आगे बढ़कर जीवन का दर्शन समझाते हैं. 52 साल पुराना 'जैसे सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को' ऐसा ही भजन है, जिसे सुनते ही मन में शांति, विश्वास और समर्पण का भाव जाग उठता है. भगवान राम की शरण में मिलने वाले सुख को बयां करता यह गीत आज भी भक्ति संगीत के प्रेमियों के बीच खास जगह रखता है. इस भजन की सबसे बड़ी खूबी इसके सरल शब्द हैं, जो जीवन की परेशानियों से जूझ रहे इंसान को उम्मीद का सहारा देते हैं. फिर दशहरा के मौके पर यह एकदम परफेक्ट सॉन्ग है. 

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'जैसे सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को' साल 1974 में रिलीज हुई हिंदी फिल्म ‘परिणय' का भजन है. इसके संगीतकार जयदेव, गीतकार रामानंद शर्मा और गायक शर्मा बंधु (चार भाई) हैं. 'परिणय' में रोमेश शर्मा और शबाना आजमी प्रमुख भूमिकाओं में नजर आए. फिल्म का निर्देशन रोमेश शर्मा ने किया था. यह फिल्म अपने दौर के उन सिनेमाई प्रयासों में गिनी जाती है, जिनमें मनोरंजन के साथ सामाजिक और आध्यात्मिक मूल्यों को भी जगह मिली.

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इस भजन को संगीतकार जयदेव ने अपनी संवेदनशील संगीत शैली से सजाया. जयदेव हिंदी फिल्म संगीत के ऐसे रचनाकार थे, जिनकी पहचान धुनों की सादगी, भावनात्मक गहराई और शब्दों के अनुरूप संगीत रचने की क्षमता से बनी. उनके संगीत में दिखावे के बजाय भावनाओं को प्रमुखता मिलती थी. शर्मा बंधुओं की गायकी इस गीत की आत्मा है. उनकी आवाज में भक्ति और विनम्रता का भाव गीत के संदेश को प्रभावशाली बनाता है. रामानंद शर्मा के लिखे शब्द भी आम बोलचाल के करीब हैं...

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जैसे सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को
मिल जाये तरुवर कि छाया
ऐसा ही सुख मेरे मन को मिला है
मैं जबसे शरण तेरी आया, मेरे राम

भटका हुआ मेरा मन था कोई
मिल ना रहा था सहारा
लहरों से लड़ती हुई नाव को
जैसे मिल ना रहा हो किनारा, मिल ना रहा हो किनारा
उस लड़खड़ाती हुई नाव को जो
किसी ने किनारा दिखाया
ऐसा ही सुख ...

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इस भजन की लोकप्रियता का आधार सिर्फ इसकी धुन नहीं, बल्कि इसका संदेश है. जिंदगी में मुश्किलें हर दौर में आती हैं, लेकिन उम्मीद और विश्वास इंसान को उनसे लड़ने की ताकत देते हैं. जयदेव का संगीत, रामानंद शर्मा के शब्द और शर्मा बंधुओं की भावपूर्ण आवाज मिलकर यही एहसास पैदा करते हैं.

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