भक्ति संगीत की बात हो तो लगता है कि गाने वाले भी भगवान के भक्त ही होंगे. गाना कंपोज करने वाले भी हरिनाम की माला ही जपते होंगे. लेकिन हिंदी सिनेमा में ऐसा भी एक सॉन्ग पॉपुलर है जो राधा और कृष्ण की भक्ति में रमा है. लेकिन खास बात ये है कि इसे लिखने वाले भी मुस्लिम है, म्यूजिक देने वाले भी मुस्लिम है. गाने से चार ऐसे कलाकार जुड़े हैं जिनका मजहब इस्लाम है. उसके बाद भी गाने की खूबसूरती और भाव में कहीं कोई कमी नजर नहीं आती है. हम बात कर रहे हैं साल 2001 में रिलीज हुई फिल्म 'लगान' के मशहूर गीत 'राधा कैसे ना जले' की. ये गाना आज भी शादी-ब्याह, कल्चरल प्रोग्राम्स और जन्माष्टमी जैसे त्योहारों पर खूब सुनाई देता है.
साल 2001 में आया और बन गया सदाबहार गीत
इस गीत में राधा की उस नाराजगी को दिखाया गया है, जब वो कान्हा को गोपियों के साथ रास करते देख जलन महसूस करती हैं. और, कान्हा अपने नटखट अंदाज से उन्हें मनाते हैं. इस गीत के बोल मशहूर गीतकार जावेद अख्तर ने लिखे थे,. जबकि इसका मधुर संगीत ए. आर. रहमान ने तैयार किया. गाने की शानदार कोरियोग्राफी सरोज खान ने की और इसे फिल्म में आमिर खान और ग्रेसी सिंह पर फिल्माया गया. इन चारों कलाकारों के कॉन्ट्रिब्यूशन ने इस गीत को इंडियन सिनेमा के सबसे यादगार भक्ति गीतों में शामिल कर दिया.
संगीत ने मिटाई धर्म की दीवारें
'राधा कैसे ना जले' इस बात का शानदार उदाहरण है कि कला और संगीत किसी एक धर्म या समुदाय तक सीमित नहीं होते. जब कलाकार पूरी श्रद्धा और ईमानदारी से काम करते हैं. तो उनकी रचना हर दिल को छू जाती है. यही वजह है कि इस गीत को आज भी लोग उतने ही प्रेम से सुनते हैं, जितना इसकी रिलीज के समय सुनते थे. गाने को आशा भोसले, उदित नारायण और वैशाली सामंत ने अपनी आवाज दी थी. इसके बोल, संगीत और नृत्य का ऐसा मेल देखने को मिला कि ये गीत रिलीज होते ही सुपरहिट बन गया. सरोज खान की कोरियोग्राफी में इंडियन क्लासिकल डांस की झलक साफ दिखाई देती है. जिसे आमिर खान और ग्रेसी सिंह ने बेहद खूबसूरती से पर्दे पर उतारा.