हिंदी सिनेमा की यादगार फिल्मों में शामिल ‘पाकीजा' एक बार फिर बड़े पर्दे पर लौटने के लिए तैयार है. मीना कुमारी और राज कुमार स्टारर इस क्लासिक फिल्म को अब 4K में रिस्टोर किया गया है. फिल्म की नई और बेहतरीन क्वालिटी वाली कॉपी को अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल्स में दिखाया जाएगा. ‘पाकीजा' को फ्रांस के ल्योन में फेस्टिवल ल्यूमियर और BFI लंदन फिल्म फेस्टिवल में दिखाया जाएगा. इसका प्रीमियर पहले वर्ल्ड फेस्टिवल प्रीमियर फ्रांस के ल्योन में होने वाले फेस्टिवल ल्यूमियर में किया जाएगा. इसके बाद यूके प्रीमियर इस साल अक्टूबर में BFI लंदन फिल्म फेस्टिवल में होगा.
दो साल में तैयार हुआ 4K वर्जन
‘पाकीजा' को 4K में रिस्टोर करने का काम फिल्म हेरिटेज फाउंडेशन ने अमरोही परिवार के साथ मिलकर किया है. इस पूरी प्रक्रिया में करीब दो साल का समय लगा. फिल्म की हालत काफी खराब हो चुकी थी. मूल कैमरा नेगेटिव भी सुरक्षित नहीं बचा है. ऐसे में टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती फिल्म की पुरानी चमक और निर्देशक कमाल अमरोही की मूल कल्पना को दोबारा पर्दे पर लाना था.
रिस्टोरेशन के दौरान फिल्म के अलग-अलग बचे हुए प्रिंट्स का इस्तेमाल किया गया. इनमें फिल्म हेरिटेज फाउंडेशन के पास मौजूद 35mm इंटरपॉजिटिव और NFDC-National Film Archive of India से मिला 35mm इंटरमीडिएट रिवर्सल प्रिंट शामिल है. पुराने फुटेज में रंग फीके पड़ चुके थे और स्क्रैच, धूल व फफूंद जैसी कई दिक्कतें थीं. टीम ने इन खामियों को दूर कर फिल्म की तस्वीर और आवाज को बेहतर बनाया. साउंड को भी 5.1 में रिस्टोर किया गया है.
मीना कुमारी के किरदार को आज भी याद करते हैं लोग
कमाल अमरोही के निर्देशन में बनी ‘पाकीजा' में मीना कुमारी ने साहिबजान का किरदार निभाया था. फिल्म में उनके साथ राज कुमार और अशोक कुमार भी नजर आए थे. लखनऊ के नवाबी दौर की पृष्ठभूमि पर बनी यह फिल्म अपनी भव्य लोकेशन, शानदार कॉस्ट्यूम, संगीत और कहानी के लिए आज भी याद की जाती है. ‘पाकीजा' की कहानी भी फिल्म जितनी ही दिलचस्प रही है. इस फिल्म को बनने में कई साल लगे और प्रोडक्शन के दौरान कई परेशानियां आईं. फिल्म की शूटिंग 1950 के दशक में शुरू हुई थी और इसे पूरा होने में करीब 14-15 साल लग गए.
रिलीज के कुछ समय बाद हुआ मीना कुमारी का निधन
‘पाकीजा' 4 फरवरी 1972 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी. यह मीना कुमारी की आखिरी फिल्म थी. फिल्म रिलीज के कुछ ही समय बाद 31 मार्च 1972 को महज 38 साल की उम्र में मीना कुमारी का निधन हो गया. इसके बाद फिल्म को दर्शकों से जबरदस्त भावनात्मक जुड़ाव मिला और यह बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता बनी.
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