मद्रास हाईकोर्ट ने गुरुवार को फिल्म अभिनेत्री तमन्ना भाटिया की ओर से दायर एक केस को खारिज कर दिया. इस केस में उन्होंने पुडुचेरी स्थित कंपनी 'पावर सोप्स लिमिटेड' से 1 करोड़ के हर्जाने की मांग की थी. उनका आरोप था कि कंपनी ने उन्हें अपना ब्रांड एंबेसडर बनाने के लिए हुए समझौते की अवधि खत्म होने के बाद भी, साबुन के रैपर और प्रमोशनल मैटेरियल पर उनकी तस्वीरों का इस्तेमाल जारी रखा. जस्टिस पी. वेलमुरुगन और जस्टिस के. गोविंदराजन तिलकवडी की एक डिवीजन बेंच ने तमन्ना भाटिया की ओर से 2018 में दायर एक अपील को खारिज कर दिया.
इस अपील में उन्होंने हाई कोर्ट के एक सिंगल जज द्वारा 17 अप्रैल, 2017 को उनके 2011 के सिविल केस को खारिज किए जाने के फैसले को चुनौती दी थी. बेंच को जस्टिस टी. रविंद्रन द्वारा सिविल केस को हर्जाने के साथ खारिज किए जाने के फैसले में दखल देने का कोई कारण नहीं मिला.
तमन्ना भाटिया का पक्ष
अपनी 2011 की शिकायत में तमन्ना ने कहा था कि फिल्म और विज्ञापन, दोनों ही इंडस्ट्री में उनकी प्रोफाइल की काफी अहमियत है. उन्होंने बताया कि 2008 में 'पॉवर सोप्स' ने उनसे संपर्क किया था और उन्हें अपने प्रोडक्ट का ब्रांड एंबेसडर बनने का प्रपोजल दिया था. कंपनी ने अपने प्रोडक्ट्स के प्रचार के लिए उन्हें सैलेरी देने की पेशकश की थी, जिसके बाद 7 अक्टूबर, 2008 को दोनों पक्षों के बीच एक समझौता हुआ. इसके बाद तमन्ना ने एक फोटो शूट में हिस्सा लिया और उसके बाद कंपनी के कारोबार में कई गुना बढ़ोतरी हुई. अभिनेत्री ने दावा किया कि हालांकि 'पॉवर सोप्स' 6 अक्टूबर, 2009 के बाद भी इस समझौते को जारी रखने का इच्छुक था, लेकिन उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया.
2010 में जब तमन्ना 'विप्रो' के साथ उनके साबुन के प्रचार को लेकर बातचीत कर रही थीं, तब उन्हें पता चला कि 'पॉवर सोप्स' समझौते की अवधि खत्म होने के बाद भी उनके वीडियो और तस्वीरों का इस्तेमाल जारी रखे हुए है. इसलिए उन्होंने 2011 में यह केस दायर करने का फैसला किया. इस केस में उन्होंने 'पॉवर सोप्स' पर अपनी लोकप्रियता का गलत तरीके से और अपने निजी फायदे के लिए दुरुपयोग करने का आरोप लगाते हुए 1 करोड़ के हर्जाने की मांग की थी.
पॉवर सोप्स का तर्क
दूसरी ओर, Power Soaps ने अभिनेत्री की ओर से लगाए गए सभी आरोपों से इनकार किया और कहा कि 2008 में जब समझौता हुआ था, तब वह इतनी मशहूर नहीं थीं. कंपनी ने कहा कि उन्हें एक साल के कॉन्ट्रैक्ट के लिए सिर्फ 1 लाख का भुगतान किया गया था और इस दावे से इनकार किया कि उनके कारण कंपनी का कारोबार कई गुना बढ़ गया था. कंपनी ने यह भी जोर देकर कहा कि समझौते की अवधि खत्म होने के बाद उसने उनकी तस्वीरों का इस्तेमाल करना बंद कर दिया था.
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जज ने यह फैसला दिया कि अभिनेत्री अपने मामले के समर्थन में कोई भी ऐसा सबूत पेश करने में नाकाम रहीं, जिसे नकारा न जा सके. न्यायमूर्ति रविंद्रन ने कहा, "वादी ने यह मुकदमा ऐसे सबूतों के आधार पर दायर किया है जो अविश्वसनीय और अस्वीकार्य हैं; इसलिए, वह अपनी मांगें पूरी करवाने के लिए अपना मामला साबित करने में असमर्थ रही हैं."