फैज अहमद फैज की 64 साल पुरानी वो शायरी, जिससे हिल गया था पूरा पाकिस्तान, नूरजहां की आवाज और धुन ने आज तक रखा है जिंदा

फैज अहमद फैज कुछ नज्में ऐसी रही हैं, जो कभी भी पुरानी नहीं हो पाई हैं. उन्हीं में से एक नज्म 'मुझसे पहली सी मोहब्बत मिरी महबूब न मांग' है. 64 साल पुरानी फैज अहमद फैज की इस नज्म को मल्लिका-ए-तरन्नुम नूरजहां ने अपनी आवाज से अमर किया है.

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फैज अहमद फैज की 64 साल पुरानी वो शायरी, जिससे हिल गया था पूरा पाकिस्तान
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फैज अहमद फैज पाकिस्तान के वो शायर थे जिनकी नज्म आज भी लोग सुनना और पढ़ना पसंद करते हैं. उनकी नज्म पर कई फिल्मी गाने भी बन चुके हैं जो हमेशा से सुने जाते रहे हैं. फैज अहमद फैज कुछ नज्में ऐसी रही हैं, जो कभी भी पुरानी नहीं हो पाई हैं. उन्हीं में से एक नज्म 'मुझसे पहली सी मोहब्बत मिरी महबूब न मांग' है. 64 साल पुरानी फैज अहमद फैज की इस नज्म को मल्लिका-ए-तरन्नुम नूरजहां ने अपनी आवाज से अमर किया है.  

नूरजहां फैज के नज्म को बनाया अमर

'मुझसे पहली सी मोहब्बत मिरी महबूब न मांग' में नूरजहां न केवल आवाज दी है, बल्कि उनकी खुद बनाई धुन लदी है. कुछ दर्शक इस नज्म को गाना भी समझते हैं जो न सिर्फ संगीत प्रेमियों बल्कि इतिहास के पन्नों में भी दर्ज है. यह नज्म मशहूर शायर फैज अहमद फैज ने लिखी थी. इसमें प्रेम के साथ-साथ जीवन की सच्चाइयों का गहरा भाव है. नूरजहां बचपन से ही फैज साहब की शायरी की दीवानी थीं. उन्होंने इन पंक्तियों को लेकर खुद धुन तैयार की थी.

कहानी उस समय की है जब फैज अहमद फैज अपने विचारों के कारण जेल में बंद थे. पाकिस्तान में एक सरकारी सांस्कृतिक कार्यक्रम हो रहा था. नूरजहां ने अपने गानों की लिस्ट दी, जिसमें यह नज्म भी शामिल थी. लेकिन आयोजकों ने फैज के प्रतिबंधित होने की वजह से उन्हें यह गाना गाने से मना कर दिया. नूरजहां ने जिद की और आखिरकार आयोजकों को मानना पड़ा.

पाकिस्तान नज्म सुनकर हुआ दंग

जब उन्होंने रेडियो पाकिस्तान के लाइव प्रसारण पर अपनी धुन में यह नज्म गानी शुरू की, तो पूरा देश सुनकर दंग रह गया. गाने की लोकप्रियता इतनी बढ़ी कि साल 1962 में आई पाकिस्तानी फिल्म 'कैदी' में इसे शामिल कर लिया गया. नूरजहां की आवाज और धुन के साथ यह गाना लोगों के दिलों में बस गया और हमेशा के लिए अमर हो गया.

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शिल्पा राव ने दिया मॉडर्न टच

आज के समय में भी कई कलाकारों ने इसे अपने अंदाज में गाया है. शिल्पा राव ने इसे मॉडर्न टच दिया. कोक स्टूडियो में हुमैरा चन्ना और नबील शौकत अली ने भी इसे प्रस्तुत किया, जिसे लाखों लोगों ने पसंद किया. लेकिन मूल गाने का जादू आज तक कोई नहीं छू पाया.

यह नज्म सिर्फ संगीत नहीं, बल्कि बगावत, सम्मान और कला के अटूट रिश्ते की कहानी है. नूरजहां ने जिस साहस और जज्बे से इसे गाया, वह आज भी प्रेरित करता है. 64 साल बीत जाने के बाद भी 'मुझसे पहली सी मोहब्बत' सुनने वालों के दिलों को छूता है. 

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