Exclusive: 2 अक्टूबर 1973, मौका गांधी जयंती, सेट भी लगा कैमरा भी तैयार फिर भी ना हो पाई शोले की शूटिंग, रमेश सिप्पी से जानें क्यों

शोले हिंदी सिनेमा की कल्ट और सदाबहार फिल्मों में से एक हैं. 50 साल पहले रिलीज हुई सिनेनाघरों में इस फिल्म ने ना केवल कई रिकॉर्ड बनाए थे, बल्कि बंपर कमाई भी की थी.

विज्ञापन
Read Time: 2 mins
Exclusive: 2 अक्टूबर 1973, मौका गांधी जयंती,
नई दिल्ली:

शोले हिंदी सिनेमा की कल्ट और सदाबहार फिल्मों में से एक हैं. 50 साल पहले रिलीज हुई सिनेनाघरों में इस फिल्म ने ना केवल कई रिकॉर्ड बनाए थे, बल्कि बंपर कमाई भी की थी. फिल्म से जुड़े कई किस्से और कहानी हैं. शोले की चर्चा कभी डाकू गब्बर सिंह को लेकर होती है तो कभी जय-वीरू की दोस्ती को लेकर. लेकिन इस फिल्म से जुड़ा एक और खास किस्सा है. यह किस्सा गांधी जयंती से जुड़ा हुआ है. जी हां, आप भी सोच रहे होंगे ये किस्सा क्या है. 

ये भी पढ़ें: टाइगर भी गया और कबीर भी गया YRF को बचाने आएगा अल्फा, सबूत है बॉबी देओल का ये VIDEO

दरअसल शोले के 50 साल पूरे होने पर फिल्म के डायरेक्टर रमेश सिप्पी ने एनडीटीवी डॉट कॉम से खास बातचीत की. इस दौरान उन्होंने शोले से जुड़े कई किस्से भी शेयर किए. रमेश सिप्पी ने बताया कि शोले फिल्म का ख्याल हेमा मालिनी की फिल्म सीता-गीता के बाद आया. दरअसल उन्होंने जब शोले को पूरी तरह से बनाने का फैसला किया और शूटिंग शुरू करने का फैसला किया तो रमेश सिप्पी ने 2 अक्टूबर साल 1973 यानी गांधी जयंती के दिन को चुका. हालांकि उस दिन रमेश सिप्पी फिल्म की शूटिंग नहीं कर पाए थे क्योंकि बारीश पड़ गई थी. ऐसे में देखा जाए तो शोले का गांधी जयंती के साथ भी खास कनेक्शन रहा है. 

आपको बता दें कि धर्मेंद्र और अमिताभ बच्चन की जय-वीरू वाली जोड़ी की जबरदस्त कल्ट क्लासिक फिल्म शोले के 50 साल पूरे हो गए हैं. लेकिन फिल्म का चाव आज भी सिनेप्रेमियों के बीच कम नहीं हुआ है. शोले इस स्वतंत्रता दिवस पर अपने 50 साल पूरे कर लेगी. 15 अगस्त 1975 में रिलीज हुई शोले को रमेश सिप्पी ने डायरेक्ट किया था. 70 के दशक की यह सबसे कमाऊ फिल्म है. इस फिल्म के लिए इसकी स्टार कास्ट को बतौर फीस मोटी रकम मिली थी. धर्मेंद्र, अमिताभ बच्चन, अमजद खान, संजीव कुमार, हेमा मालिनी और जया बच्चन को बतौर फीस पैसे मिले थे. 

Featured Video Of The Day
US-South Korea Military Drill: Iran के बाद Kim Jong Un टारगेट पर? Nuclear War का बढ़ा खतरा
Topics mentioned in this article