सलमान खान से मिलवाने का वादा रह गया अधूरा, वक्त ने छीन लिया मौका, धुरंधर सिंगर की कहानी सुन रो पड़ेंगे आप

धुरंधर के गाने जान से गुजरते हैं को दर्शकों का जबरदस्त प्यार मिला है. इस गाने को पंजाबी सूफी सिंगर खान साब ने अपनी आवाज दी. हाल ही में दिए एक इंटरव्यू के दौरान खान साब ने अपनी सफलता के साथ-साथ पर्सनल जिंदगी के दर्द को भी शेयर किया.

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मां की आखिरी ख्वाहिश पूरी न कर पाए धुरंधर सिंगर

कभी एक गाना सिर्फ गाना नहीं होता, वो किसी की किस्मत बदल देता है. ‘धुरंधर द रिवेंज' का एक ऐसा ही गाना अचानक लोगों के दिलों पर छा गया और हर जगह उसी की चर्चा होने लगी. ये गाना उस्ताद नुसरत फतेह अली खान की मशहूर कव्वाली का रीमेक था, लेकिन इसमें जो दर्द और सच्चाई थी, उसने इसे खास बना दिया. पंजाबी सूफी सिंगर खान साहब की आवाज ने इस गाने में जान डाल दी और देखते ही देखते वो एक नए सितारे के रूप में उभर आए. लेकिन इस कामयाबी के पीछे एक ऐसी कहानी छिपी है, जो खुशी के साथ-साथ आंखें भी नम कर देती है.

सक्सेस के बीच छलका दर्द

हाल ही में दिए एक इंटरव्यू के दौरान खान साब ने अपनी सफलता के साथ-साथ पर्सनल जिंदगी के दर्द को भी शेयर किया. उन्होंने बताया कि ‘धुरंधर 2' के म्यूजिक लॉन्च के बाद वो सीधे अपने माता-पिता की कब्र पर गए थे. इस दौरान वो अपनी मां को याद करते हुए भावुक हो गए और उनकी एक अधूरी ख्वाहिश का जिक्र किया. खान साब ने बताया कि उनकी मां बॉलीवुड स्टार सलमान खान की बहुत बड़ी फैन थीं. उनका सपना था कि वो एक बार सलमान खान से मिलें. 

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सिंगर ने कहा, 'अम्मी मुझसे हमेशा कहती थीं कि उन्हें सलमान खान से मिलवा दूं. लेकिन उस समय मेरा इंडस्ट्री में कोई नाम नहीं था. मैं खुद ही उनसे नहीं मिल पाया, तो अम्मी को कैसे मिलवाता?' उन्होंने आगे कहा कि जब अब उन्हें पहचान मिली है, तब उनकी मां इस दुनिया में नहीं हैं. ऐसे में ये सपना सिर्फ सपना ही रह गया.

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माता-पिता को खोने का दर्द

खान साहब के लिए साल 2025 बहुत मुश्किल भरा रहा. सितंबर 2025 में उन्होंने अपनी मां को खो दिया, उस समय वो कनाडा में एक शो के लिए गए हुए थे. मां के जाने का दुख अभी संभल भी नहीं पाया था कि करीब 17 दिन बाद उनके पिता का भी देहांत हो गया. इतने कम समय में दोनों को खोना उनके लिए बहुत बड़ा झटका था. इस दर्दनाक दौर ने उनकी जिंदगी को पूरी तरह बदल दिया, लेकिन उन्होंने खुद को टूटने नहीं दिया. अपने काम और संगीत के सहारे उन्होंने खुद को संभालने की कोशिश की. खान साहब की ये कहानी बताती है कि सफलता के पीछे कितनी बड़ी मेहनत और दर्द छिपा होता है. एक तरफ उन्हें ‘धुरंधर' से नई पहचान मिली, तो दूसरी तरफ मां का सपना पूरा न कर पाने का दुख आज भी उनके दिल में जिंदा है.

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