देव आनंद का वो गाना जो 65 साल से रहा है गर्लफ्रेंड-बॉयफ्रेंड का फेवरेट, साहिर लुधियानवी की कलम से निकला था ये अमर गीत

फिल्म भले ही फ्लॉप रही हो, लेकिन इसका एक गाना आज भी हर दिल पर छाया हुआ है. आखिर किस गीतकार ने ऐसे अमर बोल लिखे कि दशकों बाद भी इस गाने की लोकप्रियता जरा भी कम नहीं हुई?

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जिस फिल्म को लोग भूल गए, उसका ये गाना आज भी हर महफिल की जान है!

हिंदी सिनेमा में कुछ गाने ऐसे हैं, जिन्हें वक्त की धूल भी नहीं ढक पाई है. पीढ़ियां बदल जाती हैं, सितारे बदल जाते हैं, लेकिन उनकी धुन और बोल लोगों के दिलों में हमेशा जिंदा रहते हैं. ऐसा ही एक गीत है, जिसे आज भी प्यार, जुदाई और अधूरी मुलाकातों का सबसे खूबसूरत इजहार माना जाता है. दिलचस्प बात यह है कि जिस फिल्म में यह गाना था, वह बॉक्स ऑफिस पर कोई खास कमाल नहीं दिखा पाई. मगर इस एक गाने ने फिल्म को हमेशा के लिए अमर बना दिया. वह सदाबहार गीत है 'अभी ना जाओ छोड़कर कि दिल अभी भरा नहीं है.'

फिल्म फ्लॉप हुई, लेकिन गानों ने रच दिया इतिहास

1961 में रिलीज हुई फिल्म 'हम दोनों' में देव आनंद, साधना और नंदा मुख्य भूमिकाओं में नजर आए थे. फिल्म के डायरेक्टर विजय आनंद थे. कहानी आनंद (देव आनंद) और मीता (साधना) की प्रेम कहानी पर आधारित थी. आनंद एक गरीब और बेरोजगार युवक होता है, जिसे अमीर परिवार की मीता से प्यार हो जाता है. खुद को उसके योग्य साबित करने के लिए वह सेना में भर्ती हो जाता है. फौज में उसकी मुलाकात अपने हमशक्ल मेजर मनोहर से होती है. युद्ध के दौरान मेजर लापता हो जाते हैं और उन्हें शहीद मान लिया जाता है. इसके बाद आनंद को उनके परिवार तक यह दुखद खबर पहुंचाने भेजा जाता है. वहां सभी उसे ही मेजर समझ लेते हैं और कहानी कई इमोशनल मोड़ों से गुजरती है. अंत में मेजर सकुशल लौट आते हैं और कहानी का सुखद अंत होता है. हालांकि, फिल्म दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचने में सफल नहीं रही, लेकिन इसके छहों गाने सुपरहिट साबित हुए. इनमें सबसे ज्यादा फेमस हुआ 'अभी ना जाओ छोड़कर', जिसे मोहम्मद रफी और आशा भोसले ने अपनी मधुर आवाज दी.

साहिर लुधियानवी की कलम ने रचा था जादू

इस अमर गीत के बोल मशहूर शायर और गीतकार साहिर लुधियानवी ने लिखे थे, जबकि इसका म्यूजिक जयदेव ने तैयार किया था. गीत के भाव, शब्दों की सादगी और धुन ने इसे हिंदी सिनेमा के सबसे यादगार रोमांटिक गीतों में शामिल कर दिया. सिर्फ यही नहीं, 'हम दोनों' के बाकी गीत भी साहिर लुधियानवी की कलम का कमाल थे. इनमें 'मैं जिंदगी का साथ निभाता चला गया', 'कभी खुद पे कभी हालात पर रोना आया', 'अल्लाह तेरो नाम', 'प्रभु तेरो नाम' और 'जहां में ऐसा कौन है' जैसे सदाबहार गाने शामिल हैं. 'अभी ना जाओ छोड़कर' आज भी रेडियो, महफिलों और लव ट्रैक्स की प्लेलिस्ट का अहम हिस्सा है.

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