झूठी है बॉर्डर की कहानी? भड़के लोंगेवाला युद्ध लड़ चुके सैनिक, कहा- हमारे नाम पर पैसे कमा रहे सनी देओल

जहां एक तरफ बॉलीवुड की नई फिल्म ‘बॉर्डर 2’ को दर्शकों का अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है, वहीं दूसरी तरफ पुरानी सुपरहिट फिल्म ‘बॉर्डर’ को लेकर अब विवाद खड़ा हो गया है. करीब 29 साल बाद लोंगेवाला की लड़ाई में शामिल रहे एक पूर्व सैनिक ने फिल्म की कहानी पर सवाल उठाए हैं

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लोंगेवाला युद्ध लड़ चुके सैनिक ने उठाए बॉर्डर 2 की कहानी पर सवाल

जहां एक तरफ बॉलीवुड की नई फिल्म ‘बॉर्डर 2' को दर्शकों का अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है, वहीं दूसरी तरफ पुरानी सुपरहिट फिल्म ‘बॉर्डर' को लेकर अब विवाद खड़ा हो गया है. करीब 29 साल बाद लोंगेवाला की लड़ाई में शामिल रहे एक पूर्व सैनिक ने फिल्म की कहानी पर सवाल उठाए हैं और इसे सच्चाई से दूर बताया है. पंजाब के मोहाली में रहने वाले 81 वर्षीय हवलदार मुख्तियार सिंह, जो 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान लोंगेवाला पोस्ट पर तैनात थे, उन्होंने दावा किया है कि फिल्म में दिखाए गए कई तथ्य गलत हैं. उनका कहना है कि असली घटनाओं को फिल्म में तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया, जिससे वे काफी आहत हैं.

कितने जवान हुए थे शहीद?

मुख्तियार सिंह के अनुसार, फिल्म में दिखाया गया है कि लगभग सभी भारतीय जवान शहीद हो गए थे, जबकि हकीकत इससे बिल्कुल अलग थी. उन्होंने बताया कि उस मोर्चे पर करीब 120 भारतीय जवान मौजूद थे और पूरे युद्ध में सिर्फ तीन जवान ही शहीद हुए थे. बाकी सभी सैनिक सुरक्षित थे. उनका कहना है कि फिल्म में सैनिकों की बहादुरी को गलत तरीके से दिखाया गया है.

45 टैंक भारतीय सीमा में घुसे 

उन्होंने बताया कि यह घटना 4 और 5 दिसंबर 1971 की है, जब पाकिस्तान की सेना ने अचानक हमला किया था. उस समय वे सेना में क्लर्क थे, लेकिन हालात ऐसे बने कि वे मोर्चे तक पहुंच गए. उन्होंने कहा कि उन्होंने दुश्मन के टैंकों की आवाज सुनकर अपने अधिकारियों को अलर्ट किया था. उनके मुताबिक, पाकिस्तान के लगभग 45 टैंक भारतीय सीमा में घुस आए थे और लगातार फायरिंग कर रहे थे.

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'हम उस युद्ध के असली हीरो'

मुख्तियार सिंह ने कहा कि उन्होंने अपने वरिष्ठ अधिकारी को समय रहते जानकारी दी, जिसके बाद सभी सैनिकों को सतर्क कर दिया गया. चांदनी रात होने के कारण दुश्मन की गतिविधियां साफ दिखाई दे रही थीं और भारतीय जवानों ने बहादुरी से मुकाबला किया. पूर्व सैनिक का यह भी आरोप है कि फिल्म में असली सैनिकों का जिक्र नहीं किया गया और ना ही उन्हें कोई सम्मान मिला. उन्होंने कहा, “हम उस युद्ध के असली हीरो हैं, लेकिन हमें कोई नहीं पूछता. फिल्म में सबको शहीद दिखा दिया गया, जबकि सच कुछ और है.”

सनी देओल से अपील 

उन्होंने अभिनेता सनी देओल से अपील की है कि वे कम से कम उन सैनिकों से मिलें, जिन्होंने असल में यह युद्ध लड़ा था. उनका कहना है कि फिल्म से जुड़े लोग अगर कुछ नहीं कर सकते तो कम से कम सच्चाई सामने लाने की कोशिश करें. मुख्तियार सिंह ने यह भी कहा कि वे पिछले दो साल से अपनी बात सरकार तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने राजस्थान के मुख्यमंत्री, रक्षा मंत्री और प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर इस मामले में ध्यान देने की मांग की है. उनका कहना है कि इतने सालों बाद भी सरकार ने उनकी बात पर कोई ध्यान नहीं दिया.

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फिल्म के नाम पर हो रही कमाई 

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि फिल्म के जरिए उनके नाम पर कमाई की जा रही है, लेकिन असली सैनिकों को ना तो सम्मान मिला और ना ही कोई पहचान. उनका कहना है कि उन्हें किसी पुरस्कार या पैसे की लालसा नहीं है, लेकिन इतिहास को सही तरीके से दिखाना जरूरी है. अब इस पूरे मामले ने एक नई बहस छेड़ दी है कि फिल्मों में दिखाई जाने वाली कहानियां कितनी हद तक सच्चाई के करीब होती हैं और क्या असली हीरो को उनका हक मिल पाता है या नहीं.

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