हिंदी सिनेमा में प्यार वाले गाने तो आपने खूब सुने होंगे. फिल्मी गानों के बोल, संगीत और उसके गाने वाले हर कोई अपनी मेहनत करता है और तब जाकर एक गाना बनता है. लेकिन वहीं बात करें लोकगीतों की तो इसको बनाने के लिए न तो किसी संगीतकार की जरूरत होती है और न ही किसी सिंगर की. लोकल भाषा में बने ये गीत वहीं के लोगों की आवाज में ऐसे छाते हैं कि दिल में उतर जाते हैं. आज हम आपको एक ऐसे ही हिमाचली पहाड़ियों से जुड़ा एक लोकगीत बताएंगे, जिसमें न तो कई फिल्मी हीरो है, न हीरोइन. लेकिन इस गीत के बोल और कहानी दिल को छू जाती है. ये एक प्यार में पड़ी हुई बेटी का गाना है, जिसकी चिंता उसकी मां को होती है और गीत में बोलचाल की भाषा में रखते हुए, गाया जाता है. तो चलिए जानते हैं इस गीत की कहानी.
हम बात कर रहे हैं पहाड़ी लोकगीत 'अम्मा पुछदी' , ये हिमाचल प्रदेश का पारंपरिक पहाड़ी लोकगीत है. इसमें एक मां अपनी बेटी से पूछती है कि वो इतनी कमजोर क्यों हो गई है, और उसकी नींद कहा उड़ गई है. इस पर मां से सीधे अपने दिल की बात नहीं बताती. बल्कि मोर का जिक्र करते हुए कहती है कि उसने ही मेरी रातों की नींद छीन रखी है. आखिर ये मोर है क्या, इसका ऐसा क्या रिश्ता है?
क्या है 'अम्मा पुछदी' गाने की कहानी?
'अम्मा पुछदी' हिमाचल प्रदेश का पारंपरिक पहाड़ी लोकगीत है. ब्रिटिश काउंसिल की लोकगीत की शीट में भी इसे पारंपरिक हिमाचली गीत बताया गया है. इस गीत में मां अपनी बेटी से पूछती है कि वो इतनी दुबली क्यों हो गई है. इस पर बेटी जवाब देती है कि जंगल के पार बोलने वाले मोर ने उसकी नींद उड़ा दी है. ये मोर उसका प्रेमी है. वो मां से अपने प्यार के बारे में खुलकर बात नहीं कर सकती है, इसलिए मोर के बहाने बात करती है. गाने के बोल इस तरह हैं-
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अम्मा पूछदी सुन धिये मेरिये,
दुबली इतनि किन्या करी होई हो,
दुबली इतनि किन्या करी होई हो,
परली बनियाँ, मोर जो बोले हो,
परली बनियाँ, मोर जो बोले हो,
परली बनियाँ, मोर जो बोले हो,
परली बनियाँ, मोर जो बोले हो,
आमा जी इन मोर, निंदर गवैं हो,
आमा जी इन मोर, निंदर गवैं हो,
हो, आमा जी इन मोर, निंदर गवैं हो,
हो, आमा जी इन मोर, निंदर गवैं हो
मोर को मारने की बात सुनकर क्यों घबरा जाती है बेटी?
अपनी बेटी की परेशानी जानकर उसकी मां बोलती है कि मोर को मरवा दिया जाएगा, ताकि उसके बेटी आराम से सो पाएं. लेकिन ये बात सुनकर बेटी परेशान हो जाती है. अपनी मां से कहती है कि मोर को मारना नहीं चाहिए, उसे पिंजरे में रख लेना चाहिए. वो उसको खोना नहीं चाहती है. गाने के बोलों में अपने प्रेमी के लिए प्यार साफ झलकता है. यही इस लोकगीत का सबसे दिलचस्प हिस्सा है.
मां का जवाब जीत लेगा दिल, कंगना रनौत भी हैं फैन
गाने के बोल इसी तरह से आगे बढ़ते हैं. आखिर में बेटी अपनी मां से पूछती है कि आखिर तार और चांद कहां चले जाते हैं और दिल के प्यारे लोग कहां जाते हैं. मां उसे समझाती है कि चांद और तारे तो छिप जाते हैं, लेकिन जो लोग दिल के करीब होते हैं, वे कभी दिल से दूर नहीं होते. ये गाना कंगना रनौत का भी पसंदीदा लोकगीत है. कंगना ने अपने सोशल मीडिया पर हिमाचली पहनावे में अपनी तस्वीरों के साथ इस गाने को शेयर. इस गाने के अलग-अलग संस्करण मौजूद हैं. सिंगर आकांक्षा भंडारी ने इसे अपने डेब्यू EP Raahi के लिए गाया था. उनके ऑफिशियल यूट्यूब चैनल पर इस वीडियो को 13.5 लाख व्यूज मिल चुके थे.