एक वक्त था जब अक्षय कुमार की फिल्में लगातार बॉक्स ऑफिस पर दम तोड़ रही थीं. हालात ऐसे हो गए थे कि इंडस्ट्री में उन्हें फ्लॉप एक्टर तक कहा जाने लगा. बड़े बैनर भी सोच-समझकर उन्हें फिल्में ऑफर कर रहे थे. ऐसा लगने लगा था कि उनका स्टारडम अब खत्म होने वाला है. लेकिन तभी अक्षय ने एक ऐसा रिस्क लिया, जिसे उस दौर में कोई बड़ा हीरो लेने की हिम्मत नहीं करता था. उन्होंने हीरो नहीं, बल्कि विलेन बनने का फैसला किया और यही फैसला उनके करियर का सबसे बड़ा गेम चेंजर बन गया.
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विलेन के रोल ने बना दिया हिट
साल 2001 में रिलीज हुई 'अजनबी' ने अक्षय कुमार के करियर का डायरेक्शन ही चेंज कर दिया. अब्बास मस्तान के डायरेक्शन में बनी इस थ्रिलर फिल्म में अक्षय कुमार, बॉबी देओल, करीना कपूर और डेब्यू कर रहीं बिपाशा बसु नजर आए थे. उस समय हर किसी को लगा था कि एक बड़ा स्टार निगेटिव रोल निभाकर बड़ा जोखिम उठा रहा है. लेकिन फिल्म रिलीज होते ही पूरा खेल बदल गया. पर्दे पर अक्षय कुमार का चालाक, खतरनाक और ट्विस्ट से भरा किरदार दर्शकों को इतना पसंद आया कि लोग हीरो से ज्यादा विलेन की चर्चा करने लगे. उनकी स्क्रीन प्रेजेंस और अंदाज ने फिल्म में अलग ही जान डाल दी. करीब 17 करोड़ रुपये के बजट में बनी इस फिल्म ने दुनिया भर में लगभग 31.83 करोड़ रुपये का कारोबार किया और बॉक्स ऑफिस पर कामयाब रही. इसके साथ ही अक्षय के माथे पर लगा फ्लॉप एक्टर का टैग भी धीरे धीरे मिटने लगा.
अवॉर्ड जीता... और बन गए सुपरस्टार
'अजनबी' सिर्फ एक हिट फिल्म नहीं थी, बल्कि अक्षय कुमार के करियर की नई शुरुआत थी. इस फिल्म में दमदार निगेटिव रोल के लिए उन्हें फिल्मफेयर बेस्ट परफॉर्मेंस इन ए नेगेटिव रोल का अवॉर्ड मिला. ये उनके करियर का पहला बड़ा फिल्मफेयर अवॉर्ड था. वहीं बिपाशा बसु ने भी अपनी पहली ही फिल्म के लिए बेस्ट फीमेल डेब्यू का फिल्मफेयर अवॉर्ड अपने नाम किया. 'अजनबी' के बाद अक्षय कुमार ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. उन्होंने एक्शन के साथ कॉमेडी, ड्रामा, रोमांस और अलग-अलग तरह के किरदारों में खुद को साबित किया. आने वाले सालों में हेरा फेरी, मुझसे शादी करोगी, गरम मसाला, भूल भुलैया, वेलकम, सिंह इज किंग जैसी फिल्मों ने उन्हें बॉलीवुड के सबसे बड़े सुपरस्टार्स की कतार में खड़ा कर दिया.