70 साल पुराना कृष्ण भजन, जिसे रचा था 3 मुस्लिम कलाकारों ने मिलकर, आज भी मंदिरों में गूंजता है इस गीत का जादू

फिल्म बैजू बावरा के इस मशहूर भजन को सुनकर आज भी लोग भावुक हो जाते हैं. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इसे तीन मुस्लिम कलाकारों ने मिलकर बनाया था. इसकी रिकॉर्डिंग से जुड़ी कहानी भी कम दिलचस्प नहीं है.

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3 मुस्लिम कलाकारों ने मिलकर बनाया था ये कृष्ण भजन! क्या आपने सुना है?
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हिंदी सिनेमा में ऐसे कई भजन बने हैं, जिन्हें लोग आज भी मंदिरों से लेकर अपने घरों तक बड़े श्रद्धा भाव से सुनते हैं. इन गीतों की खास बात सिर्फ इनके बोल या धुन नहीं, बल्कि इनके पीछे छिपी कहानियां भी हैं. ऐसा ही एक भजन है 'मन तड़पत हरि दर्शन को आज', जिसे सुनते ही भक्ति और श्रद्धा का एहसास होने लगता है. दिलचस्प बात यह है कि इस भजन को बनाने वाले तीनों बड़े नाम मुस्लिम थे. संगीत से लेकर आवाज और बोल तक, तीन अलग-अलग कलाकारों ने मिलकर ऐसा जादू रचा कि यह गीत सात दशक बाद भी लोगों की पसंद बना हुआ है. इस भजन की रिकॉर्डिंग से जुड़ा एक किस्सा भी अक्सर चर्चा में रहता है.

तीन मुस्लिम कलाकार, लेकिन भजन बना अमर

साल 1952 में आई फिल्म 'बैजू बावरा' का यह भजन आज भी सबसे पसंद किए जाने वाले भक्ति गीतों में गिना जाता है. इसकी धुन मशहूर संगीतकार नौशाद ने तैयार की थी. इसे अपनी आवाज दी थी मोहम्मद रफी ने, जबकि इसके बोल लिखे थे शकील बदायूंनी ने. तीनों की जोड़ी ने मिलकर ऐसा गीत बनाया, जिसे आज भी भक्ति संगीत की मिसाल माना जाता है.

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इस भजन से जुड़ा एक किस्सा काफी मशहूर है. कहा जाता है कि रिकॉर्डिंग शुरू होने से पहले नौशाद ने स्टूडियो में मौजूद सभी लोगों से साफ मन और पूरी श्रद्धा के साथ आने की बात कही थी. उनका मानना था कि यह सिर्फ एक फिल्मी गीत नहीं, बल्कि भक्ति का एहसास कराने वाला भजन है. रिकॉर्डिंग के दौरान माहौल इतना शांत और भावुक हो गया था कि वहां मौजूद लोग भी उसकी गहराई महसूस करने लगे.

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पहला और आखिरी बार मिला बड़ा सम्मान

फिल्म 'बैजू बावरा' नौशाद के करियर की सबसे खास फिल्मों में गिनी जाती है. इसी फिल्म के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ संगीत का पहला और आखिरी फिल्मफेयर पुरस्कार मिला था. यही वह फिल्म भी मानी जाती है, जिसने हिंदी फिल्मों में शास्त्रीय संगीत को बड़े स्तर पर पहचान दिलाई.

100 हफ्तों तक सिनेमाघरों में चली थी फिल्म

सिर्फ गाने ही नहीं, फिल्म को भी दर्शकों ने खूब पसंद किया था. 'बैजू बावरा' करीब 100 हफ्तों तक सिनेमाघरों में चली. इसमें भारत भूषण और मीना कुमारी की जोड़ी को खूब सराहा गया और फिल्म उस दौर की सबसे बड़ी सफल फिल्मों में शामिल हो गई.

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दशकों बीत जाने के बाद भी 'मन तड़पत हरि दर्शन को आज' की लोकप्रियता कम नहीं हुई है. रेडियो हो, मंदिर हो या फिर कोई भक्ति कार्यक्रम, यह गीत आज भी उसी श्रद्धा के साथ सुना जाता है. शायद यही वजह है कि जब भी हिंदी सिनेमा के सबसे यादगार भजनों की बात होती है, यह गीत सबसे पहले याद किया जाता है.

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Maan Tadpat Hari Darshan Ko Aaj
Krishna Bhajan
Baiju Bawra
Baiju Bawra Music
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