59 साल पहले बैसाखियों के सहारे चलने वाले मलंग चाचा ने सिखाया था मनोज कुमार को सबक, 'राम हर युग में पैदा होगा, लेकिन लक्ष्मण नहीं'

करीब 59 साल पहले आई एक फिल्म ने हिंदी सिनेमा के सबसे बड़े खलनायक की पूरी इमेज बदल दी थी. बैसाखियों के सहारे चलने वाले एक किरदार और उस पर फिल्माए गए यादगार गाने ने दर्शकों का दिल जीत लिया. आज भी ये रोल और इसके डायलॉग खूब याद किए जाते हैं.

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बैसाखियों के सहारे चलने मलंग चाचा ने सिखाया था मनोज कुमार को सबक
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हिंदी फिल्मों के कुछ किरदार ऐसे होते हैं जो दर्शकों के दिलों में उतरते हैं साथ ही किसी एक्टर की इमेज को भी बदल कर रख देते हैं. करीब 59 साल पहले एक ऐसा ही किरदार आया था. जो बैसाखियों के सहारे चलता था. लेकिन उसकी बातें सीधे दिल तक पहुंचती थीं. उसकी सादगी, इंसानियत और जीवन की सीख ने दर्शकों को फिल्म के दौरान ही इमोशनल कर दिया. इस किरदार ने एक ऐसे एक्टर की छवि पूरी तरह बदल दी. जिसे लोग लंबे समय तक खलनायक के रूप में देखते रहे थे. इस किरदार ने साबित कर दिया कि दमदार एक्टिंग से किसी भी इमेज को बदला जा सकता है.

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खलनायक से बने मलंग चाचा

1967 में रिलीज हुई 'उपकार' मनोज कुमार के डायरेक्शन में बनी पहली फिल्म थी. भारत-पाक जंग 1965 के बैकड्रॉप पर बनी इस फिल्म में 'जय जवान, जय किसान' का संदेश दिखाया गया था. फिल्म में मनोज कुमार, आशा पारेख, प्रेम चोपड़ा, कामिनी कौशल, मदन पुरी और प्राण अहम भूमिकाओं में नजर आए. इस फिल्म से पहले प्राण की पहचान हिंदी फिल्मों के सबसे खतरनाक विलेन के रूप में थी. लेकिन 'मलंग चाचा' का किरदार उनके करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ.

इस गाने ने विलेन की इमेज बदल दी

बैसाखियों के सहारे चलने वाला ये फकीर जैसा इंसान अपनी बातों और सोच से लोगों का दिल जीत लेता है. दर्शकों ने पहली बार प्राण को एक नेकदिल और पॉजीटिव किरदार में देखा और उन्हें भरपूर प्यार दिया. इतना ही नहीं फिल्म में प्राण पर फिल्माया गया इमोशनल सॉन्ग 'कसमे वादे प्यार वफा...' भी आज तक याद किया जाता है. इस गाने में उनकी एक्टिंग ने साबित कर दिया कि वो सिर्फ खलनायक ही नहीं, बल्कि हर तरह के किरदार को पूरी ईमानदारी से निभाने वाले कलाकार थे.

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आज भी याद किया जाता है ये डायलॉग

'मलंग चाचा' का सबसे यादगार पल वो था, जब वह मनोज कुमार के किरदार को जीवन का गहरा सबक देते हुए कहते हैं, ‘राम हर युग में पैदा होगा, लेकिन लक्ष्मण सिर्फ एक बार पैदा हुआ था.' ये संवाद सिर्फ फिल्म की कहानी का हिस्सा नहीं था, बल्कि रिश्तों, त्याग और भाईचारे का ऐसा पैगाम था, जिसने दर्शकों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी.'उपकार' उस साल की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी. इसे सात फिल्मफेयर पुरस्कार मिले, जिनमें बेस्ट फिल्म का सम्मान भी शामिल था. साथ ही फिल्म को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में सेकेंड बेस्ट फीचर फिल्म का सम्मान भी मिला.

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