हिंदी सिनेमा में कई ऐसे गाने बने हैं जो अपने अलग अंदाज और एहसासों के जरिए याद रहते हैं. आज हम एक ऐसे ही गाने की बात करेंगे जो साल 1968 में आया था. पर्दे पर दो सितारे, विदेशी लोकेशन, खूबसूरत नजारे और पीछे से आती लता मंगेशकर की सुरीली आवाज, ये सब मिलकर एक ऐसा जादू रचते हैं कि दशकों बाद भी ये गाना सुनते ही जुबान पर चढ़ जाता है. 58 साल पहले एक ऐसे ही गाने में धर्मेंद्र और माला सिन्हा की जोड़ी ने अपने रोमांटिक अंदाज से लोगों का दिल जीत लिया था. खास बात ये है कि इस गाने में दोनों जापानी गुड्डा और गुड़िया बने थे. आज भी ये सॉन्ग पुराने हिंदी गानों को पसंद करने वालों के बीच खास जगह रखता है.
जापान की खूबसूरती में करते दिखे रोमांस
हम बात कर रहे हैं साल 1968 में आई फिल्म आंखे की. फिल्म का निर्देशन रामानंद सागर ने किया था. इस फिल्म में धर्मेंद्र और माला सिन्हा लीड रोल में थे. इस गाने में दोनों कलाकारों का रोमांटिक अंदाज के साथ ही उनका जापानी गुड्डा-गुड़िया जैसा लोगों को बेहद पसंद आया. गाने के बोल साहिर लुधियानवी ने लिखे थे और इसकी आवाज लता मंगेशकर बनी थीं. गाने का संगीत रवि ने तैयार किया था.
नजीर काजमी के शेर से बनी लाइन
'मिलती है जिंदगी में मोहब्बत कभी-कभी' के बोल प्यार मिलने की खुशी और उसकी अहमियत को बताते हैं. गाने की लाइनें बताती हैं कि जिंदगी में अगर आपके पास प्यार है तो आप खुशनसीब हैं, क्योंकि ये हर किसी को आसानी से नहीं मिलता है. साहिर लुधियानवी ने इसके बोलों को बहुत ही खूबसूरती से पेश किया. इस गाने से जुड़ी एक और दिलचस्प बात है कि साहिर जी ने 'मिलती है जिंदगी में मोहब्बत कभी-कभी' के मुखड़े के लिए शायर नजीर काजमी के एक शेर से प्रेरित होकर लिखी थी.
जिंदगी में प्रेम का साथ हर किसी को आसानी से नहीं मिलता. साहिर लुधियानवी ने अपने शब्दों से इस एहसास को खूबसूरती से पेश किया, वहीं रवि के संगीत और लता मंगेशकर की आवाज ने इसे यादगार बना दिया. फिल्म के दूसरे लोकप्रिय गीतों में ‘गैरों पे करम अपनों पे सितम', ‘तुझको रखे राम तुझको अल्लाह रखे' और ‘उस मुल्क की सरहद को' भी शामिल हैं. 'ऐ दिल, किसे नसीब ये तौफीक-ए-इज्तिराब / मिलती है जिंदगी में ये राहत कभी-कभी.' इसका मतलब है कि दिल की बेचैनी और तड़प को महसूस करने का मौका हर किसी को नहीं मिलता है. साहिर ने इन्हीं भावों को अपने अंदाज में बेहद ही खूबसूरती से ढाला और गाने को लिखा. गाने के बोल इस प्रकार हैं-
मिलती है ज़िंदगी में मोहब्बत कभी कभी
होती है दिलबरों की इनायत कभी कभी
शर्मा के मुँह न फेर नज़र के सवाल पर
लाती है ऐसे मोड़ पे क़िस्मत कभी कभी
खुलते नहीं हैं रोज़ दरीचे बहार के
आती है जान-ए-मन ये क़यामत कभी कभी
यह भी पढ़ें | हिमाचल प्रदेश और पंजाब में खूब सुना जाता है अम्मा पुछदी गाना, मोर की आवाज में छिपा प्रेमी का नाम
तन्हा न कट सकेंगे जवानी के रास्ते
पेश आएगी किसी की ज़रूरत कभी कभी
फिर खो न जाएँ हम कहीं दुनिया की भीड़ में
मिलती है पास आने की मोहलत कभी कभी
1968 की सुपरहिट फिल्म, आज भी करोड़ों बार देखा गया गाना
फिल्म 'आंखें' में धर्मेंद्र और माला सिन्हा के साथ महमूद, कुमकुम, नाजिर हुसैन, ललिता पवार और जीवन जैसे कलाकार भी नजर आए थे. ये एक जासूसी थ्रिलर मूवी थी, जिसका कहानी में एंटरटेनमेंट और रोमांच दोनों देखने को मिलता है. फिल्म 1968 की सुपरहिट फिल्मों मे एक रही. यही नहीं, रामानंद सागर को इसके निर्देशन के लिए 1969 में फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला था.
इस गाने की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि इसके वीडियो को 28 मिलियन से ज्यादा बार देखा जा चुका है. यही वजह है कि पुराने हिंदी रोमांटिक गानों की बात हो, तो लता मंगेशकर की आवाज में सजा यह गीत आज भी सुनने वालों को पुरानी यादों में ले जाता है.