मशहूर संगीतकार राजकमल ने हिंदी सिनेमा को कई यादगार धुनें दीं. “कथा”, “चश्मे बद्दूर” और “सावन को आने दो” जैसी फिल्मों का संगीत आज भी श्रोताओं के बीच अपनी खास जगह रखता है. राजकमल के बेटे सूर्य राजकमल ने एनडीटीवी से खास बातचीत में अपने पिता के काम और फिल्मों से जुड़ी कुछ दिलचस्प यादें साझा कीं. इस दौरान उन्होंने “चश्मे बद्दूर” के एक गाने में किए गए खास संगीत प्रयोग का भी जिक्र किया. सूर्य ने बताया कि इस गाने में तीन गायकों ने एक ही मुखड़े को अलग-अलग अंदाज में गाया था. उन्होंने कहा, “तीन सिंगर आप बुलाइएगा, किसी से पूछिए कि एक मुखड़ा एक ही समय में अलग-अलग स्टाइल में गा के दिखा दो.”
इन सिंगर्स ने गाया गाना
उन्होंने आगे बताया कि इस गाने को हरिहरन, शैलेंद्र सिंह और दीपानंद ने गाया था. सूर्य के मुताबिक, गाने में एक जगह तीनों गायकों की आवाजें एक साथ आती हैं, लेकिन तीनों की धुन अलग होती है. उन्होंने कहा, “सीक्वेंस के बाद जब म्यूजिक आता है, जब अंतरे के मुखड़े का स्थान आता है, उस समय वो तीनों अलग-अलग वही मुखड़ा उसी बहर में गा रहे हैं, लेकिन धुन अलग-अलग है.” सूर्य का मानना है कि इस तरह का प्रयोग आज भी आसान नहीं है. उन्होंने कहा, “बहुत… अभी नहीं कर सकता कोई भी इस तरह का काम.”
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सेट पर मगाई गई आइसक्रीम
इसके बाद उनके पिता ने उन्हें समझाया कि आइसक्रीम सिर्फ शूट के लिए नहीं मंगाई गई थी. सूर्य के मुताबिक, फारूख शेख और दीप्ति नवल ने भी उनसे आइसक्रीम खाने के लिए कहा था. हालांकि, रीटेक के दौरान आइसक्रीम पिघलने की वजह से दृश्य की निरंतरता बनाए रखना भी एक चुनौती थी.
सूर्य ने कहा, “आप सोचिए कि तब की बात है, 80 के दशक की बात बता रहा हूं मैं. टूटी-फ्रूटी मुझे अभी तक बाहर नहीं आती.”
सूर्य की यह याद बताती है कि फिल्मों से जुड़ी छोटी-छोटी चीजें भी किस तरह कलाकारों और फिल्म से जुड़े लोगों की यादों में लंबे समय तक बनी रहती हैं. “चश्मे बद्दूर” का संगीत और फिल्म की शूटिंग से जुड़ी ये यादें आज भी उनके लिए खास हैं.
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