43 साल पुराना ये गाना टूटे दिल वालों का बन गया था सहारा, आशा भोसले की आवाज सुन छलक पड़ती हैं पुरानी यादें

43 साल पहले रिलीज हुआ यह दर्दभरा गीत आज भी बेवफाई और टूटे दिल की याद दिला देता है. आशा भोसले की भावुक आवाज और स्मिता पाटिल की अदाकारी ने इसे एवरग्रीन बना दिया.

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43 साल पुराना गाना सुनते ही आ जाएगी बेवफा की याद
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नई दिल्ली:

हिंदी सिनेमा में इश्क और दिल टूटने को लेकर के कई गाने बने हैं. आज हम आपको एक ऐसे ही गाने के बारे में बताएंगे जो बेवफा की याद आने पर सुनने में ऐसा लगेगा की ये आपके लिए ही बना है. जब कोई किसी के साथ बेवफाई करता है तो दिल में कई तरह के सवाल उठते हैं. जब बेरुखी दिल पर लगती है, तो वक्त तो गुजर जाता है, जिंदगी आगे बढ़ती है, लेकिन कुछ यादें आपका पीछा कभी नहीं छोड़तीं हैं. पुरानी बातें, साथ में बिताए गए पल, कोई पुरानी तस्वीर, अधूरी मुलाकात और कोई गाना उसी दर्द को फिर से जिंदा कर देता है. आज हम 43 साल पुराने एक ऐसे ही गाने के बारे में बताएंगे जिसको बेवफा की याद आने पर जरूर सुनना चाहिए. 1983 में आई फिल्म चटपटी का गाना ' ना ये बेरुख़ी दिल भुला पाएगा' भी कुछ ऐसी ही फीलिंग्स को आवाज देता है. तो चलिए जानते हैं कौन सा है ये गाना. 

आशा भोसले की आवाज में छलका दिल टूटने का दर्द 

साल 1983 में आई फिल्म चटपटा का गाना ' ना ये बेरुख़ी दिल भुला पाएगा' को आशा भोसले ने अपनी सुरीली आवाज और दर्दभरे बोल हर टूटे हुए दिल के हाल को बयां करता है. इस गाने के बोल को हर वो शख्स महसूस कर सकता है, जिसने कभी अपने प्यार की बेरुखी झेली है. 43 साल बाद भी यह गाना पुराने प्यार की याद दिलाने की ताकत रखता है. इस गाने के बोल योगेश ने लिखे और उन्होंने हर फीलिंग्स को ऐसे बयां किया है, जो बेरुखी को भुला नहीं पाता है. गाने के बोल में जिंदगी से खुशियां छिन जाने, हंसी खोने और पुरीना यादों के साथ जीने का दर्द साफ झलकता है. आर.डी. बर्मन का संगीत और आशा भोसले ने अपनी आवाज से इन फीलिंग्स को इस तरह पेश किया कि गाना सिर्फ एक फिल्मी गीत नहीं, बल्कि टूटे दिल का एहसास बन गया. गाने के बोल इस तरह हैं- 

ना ये बेरुख़ी दिल भुला पाएगा
गुज़रने को वक़्त भले ही गुज़र जाएगा
ना ये बेरुख़ी दिल भुला पाएगा

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मुक़द्दर ने हमसे हमारी खुशी छीन ली है
हमारे लबों की छलकती हंसी छीन ली है
मुक़द्दर ने हमसे हमारी खुशी छीन ली है
हमारे लबों की छलकती हंसी छीन ली है
ख़बर क्या थी ये गम का तूफ़ां इधर आएगा
ना ये बेरुख़ी दिल भुला पाएगा
गुज़रने को वक़्त भले ही गुज़र जाएगा
ना ये बेरुख़ी दिल भुला पाएगा

स्मिता पाटिल और राज किरण की फिल्म से है गाने का नाता

फिल्म चटपटी का निर्देशन वी. रविंद्र ने किया और इसको प्रोड्यूस देवेन वर्मा ने किया था. फिल्म में स्मिता पाटिल और राज किरण ने लीड रोल प्ले किया था.हैं. इसके साथ ही फिल्म में रीमा लागू, श्रीराम लागू और सुधीर दलवी जैसे कलाकार भी शामिल थे. फिल्म की कहानी चटपटी नाम की लड़की के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसकी जिंदगी कई मुश्किल मोड़ आते हैं. आज भी अगर किसी पुराने रिश्ते की याद मन को उदास कर दे, तो इस गाने के बोल उस दर्द को समझने का मौका देते हैं. क्योंकि कुछ जख्म वक्त के साथ भर तो जाते हैं, लेकिन उनकी यादें कभी पूरी तरह नहीं मिटतीं.
 

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