अगर आपको ऐसी थ्रिलर फिल्में पसंद हैं, जिनमें हर कुछ मिनट बाद कहानी पूरी तरह पलट जाए, तो ये फिल्म आपको आखिर तक बांधे रखेगी. यहां कोई भी किरदार वैसा नहीं है जैसा पहली नजर में दिखता है. हर शख्स के पास अपना एक राज है, हर मोड़ पर नया धोखा है और हर ट्विस्ट आपके सारे अंदाजे गलत साबित कर देता है. यही वजह है कि दर्शक इस फिल्म की जमकर तारीफ कर रहे हैं. IMDb पर इसे 7.5 की रेटिंग मिली है. फिल्म का नाम है 'कॉन सिटी'.
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बच्चे की किडनैपिंग से खुलता है ठगी का पूरा खेल
'कॉन सिटी' की कहानी सरवन से शुरू होती है, जो कर्ज में डूबा हुआ है. घर में पत्नी, मां, भाई और एक छोटा बेटा है, लेकिन परिवार के रिश्तों में गर्माहट नहीं दिखती. खासकर पति-पत्नी के बीच बातचीत लगभग न के बराबर है. तभी एक दिन उनका पांच साल का बेटा स्कूल से गायब हो जाता है. सीसीटीवी फुटेज से पता चलता है कि बच्चे को कोई अनजान नहीं, बल्कि जान-पहचान वाला ही अपने साथ ले गया है. यहीं से फिल्म सात साल पीछे चली जाती है. पता चलता है कि सरवन कर्ज से निकलने के लिए बिजली के बिलों में जमा होने वाली रकम का गबन करता है. इसी बीच मित्रा की कहानी सामने आती है. बॉयफ्रेंड उसे प्रेग्नेंट छोड़कर भाग जाता है. फिर एक और धोखा उसे सड़क पर ला खड़ा करता है. हालात से हारने के बजाय वो प्रॉपर्टी मैनेजर बनकर लोगों को ठगने का रास्ता चुन लेती है. इसके बाद योगी और उसकी मां की एंट्री होती है. मां की बीमारी के नाम पर लोगों से पैसे जुटाए जाते हैं, लेकिन बाद में पता चलता है कि बीमारी पूरी तरह झूठी है.
क्लाइमैक्स में ऐसा ट्विस्ट
जब 'कॉन सिटी' की कहानी वापस प्रेजेंट में आती है तो बच्चे के किडनैपर का सच सामने आता है. हैरानी की बात ये है कि वो कोई अपराधी नहीं, बल्कि एक पुलिस अधिकारी है. यही अफसर सात साल पहले इन चारों ठगों के हाथों मात खा चुका था और अब बदला लेने वापस आया है. फिल्म यहीं एक और बड़ा झटका देती है. पता चलता है कि जिस बच्चे को सरवन अपना बेटा मानकर पाल रहा था, वो उसका असली बेटा ही नहीं है. इसके बाद पुलिस अधिकारी बच्चे की वापसी के बदले एक बड़ी ठगी करने की शर्त रखता है. मजबूरी में चारों एक बार फिर कॉन गेम का हिस्सा बनते हैं, लेकिन इस बार दांव पर सिर्फ पैसे नहीं, बल्कि एक बच्चे की जिंदगी होती है. फिल्म का क्लाइमैक्स लगातार चौंकाता है और आखिर तक ये समझना मुश्किल हो जाता है कि असली विलेन कौन है.