राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के सदस्य और वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. दिनेश कुमार असवाल ने NDTV से बातचीत में कहा कि अगर भारत के हिमालयी क्षेत्र में कोई बड़ा ग्लेशियर टूटता है या कोई ग्लेशियल झील फटती है, तो नुकसान नेपाल जैसा या उससे भी बड़ा हो सकता है. ऐसे में सिर्फ आपदा पर नहीं, बल्कि जोखिम वाली जगहों पर हो रहे निर्माण, आबादी के दबाव और प्रभावी चेतावनी व्यवस्था पर ध्यान देने की तत्काल जरूरत है.