योगी सरकार ने मदरसा शिक्षकों को असीमित अधिकार देने वाले बिल को रद्द कर दिया । दरअसल मदरसा शिक्षकों के वेतन से जुड़ा ये बिल दो हज़ार सोलह में समाजवादी सरकार के वक्त में पास हुआ था बिल में ये प्रावधान था की मदरसा शिक्षकों की ना जाँच हो सकती थी और ना ही उन पर कोई कारवाही लेकिन अब ये बिल वापस हो गया है और अब मदरसा कर्मचारी या शिक्षक अगर किसी भी तरह का अपराध करते हैं तो उन पर तुरंत कारवाई होगी पूरी रिपोर्ट आपको दिखाते हैं । हाँ । करीब दस साल पहले यानि की दो हज़ार सोलह में उत्तर प्रदेश में जब समाजवादी पार्टी की सरकार थी तब अखिलेश यादव मदरसा शिक्षकों को बचाने के लिए एक बिल लेकर आए थे जिसे योगी सरकार ने रद्द कर दिया । अखिलेश यादव की सरकार ने इस बिल को पास भी करा लिया था । बिल राज्यपाल से मंजूर कराकर राष्ट्रपति के पास भेजा गया था लेकिन राष्ट्रपति ने इस पर क्वेरी लगा दी थी और इसे वापस कर दिया था । तब से ये बिल लंबित था । दस साल बाद योगी आदित्यनाथ की कैबिनेट ने इस बिल को वापस करने की मंजूरी दे दी । उप में मार्च दो हज़ार सत्रह में विधानसभा के चुनाव हुए थे और चुनाव से कुछ वक्त पहले ही अखिलेश यादव इस बिल को लेकर आए थे । कार्यकाल के आखिरी समय में इस बिल को दी गई मंजूरी पर खूब बवाल हुआ था और बीजेपी ने अखिलेश यादव पर तुष्टिकरण करने का आरोप लगाया था । आइए आपको बताते है की इस बिल में ऐसा कुछ क्या था जिसको लेकर अखिलेश पर गंभीर आरोप लगे थे ।