तेहरान से लौटे लेखक और टिप्पणीकार अमरेश मिश्रा ने NDTV से बातचीत में ईरान के मौजूदा हालात पर कई अहम बातें साझा कीं. उनका दावा है कि हालिया विरोध महंगाई और करेंसी संकट से शुरू हुआ, लेकिन बाहरी उकसावे और सीमांत इलाकों में हिंसक घटनाओं ने इसे गंभीर मोड़ दे दिया है. वे इसे अमेरिका और ईरान के बीच वैचारिक संघर्ष का हिस्सा बताते हैं.
विरोध की शुरुआत: महंगाई और करेंसी संकट
अमरेश के मुताबिक, ईरान में विरोध की शुरुआत लाइवलीहुड के मुद्दों से हुई. करेंसी की गिरावट और अमेरिकी प्रतिबंधों ने कीमतों को बढ़ाया. सरकार ने राहत के लिए बैंक ऑफ ईरान के प्रमुख को हटाया, फूड वाउचर जारी किए, और सरकारी दरों को बाज़ार दरों से मिलाने की दिशा में कदम उठाए.
वे कहते हैं कि ईरान की अर्थव्यवस्था पर दबाव का बड़ा कारण पेट्रोडॉलर सिस्टम और अमेरिकी सेंक्शंस हैं. “अगर ईरान डीडॉलराइजेशन की दिशा में बढ़ता है, तो यह अमेरिका के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी,”
कौन लोग सड़कों पर?
अमरेश बताते हैं कि विरोध में शामिल लोग मुख्य रूप से अज़ेरी और कुर्द समुदाय से हैं. ईरान की जनसंख्या संरचना में फारसी मेनस्ट्रीम लगभग 61%, अज़ेरी 16%, और कुर्द करीब 10% हैं. उन्होंने कहा, “तेहरान के तजरीश मार्केट में मैंने देखा कि कई लोग रिजीम के खिलाफ बातें कर रहे थे. इनमें ज्यादातर अज़ेरी और कुर्द थे.”
हिंसा और गिरफ्तारियां
पिछले दिनों करमानशाह और सिस्तान-बलूचिस्तान में हिंसक घटनाएं हुईं. करमानशाह में कुर्द उग्रवादियों और सुरक्षा बलों के बीच मुठभेड़ में 20 उग्रवादी और 6 सुरक्षा कर्मी मारे गए. इसी घटना में एक तीन साल की बच्ची की मौत भी हुई. सिस्तान-बलूचिस्तान में जैश-अदल जैसे समूह सक्रिय हुए.
अमरेश का दावा है कि मस्जिदों और पुलिस स्टेशनों पर हमले हुए, और कई गिरफ्तारियां हुईं. उन्होंने कहा कि इंटरनेट बंद होने के कारण सूचनाएं भ्रम है.
बाहरी उकसावे का आरोप
अमरेश ने प्रवासी नेता रजा पहलवी पर आरोप लगाया कि उन्होंने खुलेआम लोगों से पुलिस स्टेशनों पर कब्जा करने और अमेरिका से सैन्य हस्तक्षेप की अपील की.
ईरान की सैन्य तैयारी
अमरेश का दावा है कि ईरान युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार है. ईरान के पहाड़ों के अंदर मिसाइल टनल्स, हॉर्मुज़ के पास नेवल बेस और मल्टी-लेयर्ड डिफेंस सिस्टम तैयार हैं.
अमेरिका ने सीरिया में एडवांस्ड रडार लगाए हैं, लेकिन ईरान ने रेडंडेंसी-आधारित नेटवर्किंग से जवाबी तैयारी कर रखी है.”
वैचारिक टकराव: शिया रिवोल्यूशनरी बनाम वेस्टर्न ऑर्डर
असली संघर्ष शिया रिवोल्यूशनरी आइडियोलॉजी और पश्चिमी सत्ता-संरचनाओं का है.
“ईरान मजलूमों के साथ खड़े होने की विचारधारा पर चलता है. यही अमेरिका को सबसे बड़ी समस्या है.”