एक तरफ वो कूटनीतिक उम्मीदें जो दो दिन पहले मीडिया को दिखाई गईं, और दूसरी तरफ वो मिसाइलें जो ईरान की तरफ से बरस गईं। कुवैत, जो इस पूरे झगड़े में कहीं सीधे तौर पर शामिल भी नहीं था, आज वो इस बारूदी खेल का 'ग्राउंड जीरो' बन गया है।