भारत में कब बनेगी 'मेड इन इंडिया' चिप? NDTV World Summit में अश्विनी वैष्णव ने बताया

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  • प्रकाशित: अक्टूबर 23, 2026

आईटी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि यदि पूरे सेमीकंडक्टर स्पेक्ट्रम को देखें, यानी 90 नैनोमीटर से लेकर 2 नैनोमीटर तक, तो दुनिया में इस्तेमाल होने वाली करीब 75 प्रतिशत चिप्स 28 नैनोमीटर से 90 नैनोमीटर की श्रेणी में आती हैं. चाहे रेफ्रिजरेटर हो, कार हो, मोबाइल फोन हो, माइक्रोफोन हो या अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, इनमें इस्तेमाल होने वाली अधिकांश चिप्स इसी श्रेणी की होती हैं. उन्होंने बताया कि इन चिप्स को 'लेगेसी नोड्स' कहा जाता है. सबसे ज्यादा उत्पादन और खपत इसी सेगमेंट में होती है. भले ही मूल्य और तकनीकी जटिलता के लिहाज से ये उन्नत चिप्स की तुलना में कम महत्वपूर्ण लगें, लेकिन मात्रा के हिसाब से सबसे बड़ा बाजार इसी का है. अश्विनी वैष्णव ने कहा कि वर्तमान में 28 नैनोमीटर से 90 नैनोमीटर वाली चिप्स के निर्माण की लगभग 80 प्रतिशत क्षमता एक ही देश में केंद्रित है और यह क्षमता लगातार बढ़ रही है. उन्होंने कहा कि जरा कल्पना कीजिए, पांच साल बाद 2, 3, 5 और 7 नैनोमीटर जैसी उन्नत चिप्स बनाने वाले दुनिया में कई निर्माता होंगे, लेकिन 28 से 90 नैनोमीटर वाली चिप्स का उत्पादन लगभग एक ही देश तक सीमित रह जाएगा. उन्होंने कहा कि यही भारत की रणनीति का भू-राजनीतिक महत्व है. भारत ने फैसला किया है कि सबसे अधिक मांग और उपयोग वाले इस हाई-वॉल्यूम सेगमेंट में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई जाए. चाहे क्रेन हों, ट्रक हों, ट्रेन हों, रेफ्रिजरेटर हों, व्हाइट गुड्स हों या अन्य औद्योगिक उत्पाद, लगभग हर क्षेत्र को इन चिप्स की जरूरत पड़ती है. इसी को ध्यान में रखते हुए भारत ने सेमीकंडक्टर निर्माण के इस अहम क्षेत्र पर फोकस करने का निर्णय लिया है.

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