Manipur Mass Burial
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शिशु को बचाने की कोशिश करने वाली मणिपुर की दानदाता बाद में उसे "हिंसा में मारे गए" पोस्ट में देखकर सदमे में
मणिपुर की एक महिला हिंसा पीड़ितों की लिस्ट में एक महीने के शिशु का नाम देखकर इसलिए हैरान रह गईं क्योंकि वे उसे जानती थीं. उस बच्चे को सोशल मीडिया पोस्ट पर 3 मई को शुरू हुई जातीय हिंसा का "पीड़ित" बताया गया. 41 साल की बिसोया लोइटोंगबम उस शिशु को जानती थीं क्योंकि उन्होंने उसके हिर्शस्प्रुंग रोग के इलाज के लिए एक लाख का दान दिया था. यह रोग एक जन्म दोष है जिसमें बड़ी आंत में कुछ तंत्रिका कोशिकाएं गायब होती हैं.
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शिशु को बचाने की कोशिश करने वाली मणिपुर की दानदाता बाद में उसे "हिंसा में मारे गए" पोस्ट में देखकर सदमे में
मणिपुर की एक महिला हिंसा पीड़ितों की लिस्ट में एक महीने के शिशु का नाम देखकर इसलिए हैरान रह गईं क्योंकि वे उसे जानती थीं. उस बच्चे को सोशल मीडिया पोस्ट पर 3 मई को शुरू हुई जातीय हिंसा का "पीड़ित" बताया गया. 41 साल की बिसोया लोइटोंगबम उस शिशु को जानती थीं क्योंकि उन्होंने उसके हिर्शस्प्रुंग रोग के इलाज के लिए एक लाख का दान दिया था. यह रोग एक जन्म दोष है जिसमें बड़ी आंत में कुछ तंत्रिका कोशिकाएं गायब होती हैं.