कभी-कभी इतिहास के बड़े किस्सों के पीछे ऐसी छोटी-सी कहानी छिपी होती है, जिसे सुनकर यकीन करना मुश्किल हो जाता है. सोचिए, एक तरफ सड़कों पर हजारों लोगों की भीड़ जुट रही हो और दूसरी तरफ उन्हें रोकने के लिए टीवी पर फिल्म दिखाने का प्लान बनाया जाए. साल 1977 में कुछ ऐसा ही हुआ था. दिल्ली में जगजीवन राम की रैली को लेकर लोगों में जबरदस्त उत्साह था. भीड़ को रोकने के लिए इंदिरा गांधी की सरकार ने दूरदर्शन पर दिखने वाली फिल्म तक बदलवा दी, लेकिन लोगों का जोश किसी फिल्म से कम नहीं हुआ.
रैली की भीड़ रोकने के लिए बदली फिल्म
जगजीवन राम ने कांग्रेस छोड़ने के बाद विपक्ष के साथ मिलकर दिल्ली के रामलीला मैदान में बड़ी रैली की थी. रैली में उम्मीद से कहीं ज्यादा लोग पहुंचने लगे. सरकार को लगा कि अगर लोगों का यही उत्साह रहा तो मैदान में भारी भीड़ जमा हो जाएगी. उस समय रविवार को दूरदर्शन पर शाम चार बजे फिल्म दिखाई जाती थी. उस रविवार पहले फिल्म वक्त दिखाने की जानकारी दी गई थी. लेकिन बाद में सूचना-प्रसारण मंत्री विद्याचरण शुक्ल ने फिल्म बदलने का आदेश दिया. इसकी जगह राज कपूर की फिल्म बॉबी दिखाने का फैसला हुआ. साथ ही फिल्म का समय भी चार बजे से बढ़ाकर पांच बजे कर दिया गया.
बॉबी थी युवाओं की पसंदीदा फिल्म
ऋषि कपूर और डिंपल कपाड़िया की बॉबी 1973 में रिलीज हुई थी. फिल्म की कहानी और दोनों की जोड़ी युवाओं के बीच काफी पसंद की गई थी. उस दौर में टीवी पर कोई लोकप्रिय फिल्म आना अपने आप में बड़ी बात होती थी. शायद इसी वजह से उम्मीद की गई कि लोग बॉबी देखने के लिए घरों में रुकेंगे और रैली की तरफ जाने वाली भीड़ कम हो जाएगी.लेकिन ऐसा नहीं हुआ. बॉबी का आकर्षण भी लोगों को रैली से दूर नहीं रख पाया.
एक किलोमीटर पैदल चलकर पहुंचे लोग
रैली को लेकर लोगों का जोश इतना ज्यादा था कि कई लोग करीब एक किलोमीटर पैदल चलकर रामलीला मैदान पहुंचे. रैली के आसपास बसों की आवाजाही रोक दी गई थी, फिर भी लोगों की भीड़ कम नहीं हुई. कुमी कपूर की किताब में इस घटना का दिलचस्प जिक्र मिलता है. रास्ते में इतनी भीड़ थी कि टैक्सी छोड़कर पैदल जाना पड़ा. आखिरकार साफ हो गया कि दूरदर्शन पर लोकप्रिय फिल्म दिखाने का तरीका भी लोगों को जगजीवन राम की रैली तक पहुंचने से रोक नहीं पाया.