कुछ गाने सिर्फ सुने नहीं जाते, बल्कि जीए जाते हैं. 2000 के दौर का एक ऐसा ही गाना था, जिसकी धुन सुनते ही बच्चों के कदम खुद-ब-खुद स्कूल की तरफ बढ़ने लगते थे. एक समय था जब सुबह की शुरुआत अलार्म से नहीं, बल्कि टीवी पर बजने वाली इसी प्यारी सी धुन से हुआ करती थी. ये वो गाना था जिसने बच्चों को गुनगुनाना सिखाया. इसकी धुन सुनते ही बच्चे झूम उठते थे और बड़े मुस्कुरा देते थे. गली-मोहल्लों से लेकर गांव और शहर तक हर तरफ इसी गाने की चर्चा थी. खास बात ये थी कि ये सिर्फ एक गाना नहीं था, बल्कि एक ऐसा संदेश था जिसने लाखों बच्चों को स्कूल की ओर कदम बढ़ाने के लिए प्रेरित किया.
आज भी इसकी धुन सुनते ही लोग सीधे अपने बचपन की सुनहरी गलियों में पहुंच जाते हैं. अगर आप अब तक नहीं समझ पाए हैं कि हम किस गाने की बात कर रहे हैं तो आपको बता दें कि ये वही 'स्कूल चले हम' है, जिसे सुनकर एक पूरी पीढ़ी बड़ी हुई है.
टीवी पर आते ही थम जाती थीं बच्चों की शरारतें
'स्कूल चले हम' उस दौर के उन चुनिंदा गानों में शामिल था, जिसे सुनने के लिए बच्चे खुद टीवी के सामने बैठ जाया करते थे. आज की तरह तब हर मिनट नया कंटेंट नहीं आता था, इसलिए जो चीज लोगों के दिल में जगह बना लेती थी, वो लंबे समय तक याद रहती थी. इस गाने की धुन इतनी आसान और प्यारी थी कि बच्चे इसे खेलते-कूदते, साइकिल चलाते और स्कूल जाते वक्त भी गुनगुनाते रहते थे. यही वजह थी कि ये गीत देखते ही देखते घर-घर की पहचान बन गया.
जब शान की आवाज ने बच्चों का दिल जीत लिया
शान की आवाज ने इस गाने को और खास बना दिया था. इसके बोल महबूब ने लिखे थे, जबकि संगीत शंकर-एहसान-लॉय ने तैयार किया था. भारतबाला प्रोडक्शंस के इस वीडियो को अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के शिक्षा अभियान से जोड़ा गया था. बच्चों की मासूमियत और इसकी यादगार धुन ने इसे एक पूरी पीढ़ी की पसंद बना दिया.
फिल्मी गाने जैसा मिला था प्यार
दिलचस्प बात ये है कि 'स्कूल चले हम' किसी फिल्म का गाना नहीं था, फिर भी इसकी लोकप्रियता किसी सुपरहिट बॉलीवुड सॉन्ग से कम नहीं थी. दूरदर्शन ही नहीं, कई दूसरे चैनलों पर भी इसे बार-बार दिखाया जाता था. गाने में नजर आने वाले बच्चों की मुस्कान, खूबसूरत लोकेशन्स और दिल को छू लेने वाली धुन ने इसे खास बना दिया था. यही कारण था कि ये सिर्फ बच्चों का नहीं, बल्कि बड़ों का भी पसंदीदा गीत बन गया. उस दौर में शायद ही कोई ऐसा घर रहा हो, जहां इसके बोल कभी न गूंजे हों.
आज भी सुनते ही लौट आता है बचपन
समय बदल गया, टीवी की जगह मोबाइल ने ले ली और मनोरंजन के तरीके भी पूरी तरह बदल गए. लेकिन कुछ चीजें ऐसी होती हैं जो कभी पुरानी नहीं पड़तीं. 'स्कूल चले हम' भी उन्हीं में से एक है. आज जब ये गाना सोशल मीडिया या यूट्यूब पर सुनाई देता है, तो लोग एक पल में अपने स्कूल के दिनों में पहुंच जाते हैं. दोस्तों के साथ की मस्ती, क्लासरूम की शरारतें और बेफिक्र बचपन की यादें ताजा हो जाती हैं. शायद यही वजह है कि सालों बाद भी ये गीत सिर्फ एक गाना नहीं, बल्कि एक पूरी पीढ़ी की सबसे खूबसूरत याद बनकर लोगों के दिलों में जिंदा है.
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