फिरोजशाह कोटला स्टेडियम में सोमवार को आईसीसी विश्व कप-2011 के अंतर्गत कनाडा और केन्या के बीच मुकाबला होगा।
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New Delhi:
फिरोजशाह कोटला स्टेडियम में सोमवार को आईसीसी विश्व कप-2011 के अंतर्गत कनाडा और केन्या के बीच मुकाबला होगा। ग्रुप-ए की इन दोनों टीमों को अब तक जीत की तलाश है। इस मैच का परिणाम ग्रुप-ए की तालिका में किसी प्रकार का फर्क नहीं लाएगा,क्योंकि दूसरी टीमें पहले ही खाता खोल चुकी हैं। इस लिहाज से यह मुकाबला इस ग्रुप की दूसरी टीमों के लिए न्यूनतम महत्व वाला लेकिन खेलने वाली टीमों के लिए काफी महत्वपूर्ण होगा। महत्वपूर्ण मात्र इसलिए नहीं है कि इससे जीतने वाली टीम को तालिका में ऊपर जाने का मौका मिल जाएगा, बल्कि इसलिए कि उलटफेर की संभावनाओं को बीच अगले दो मैचों में उसे अपना श्रेष्ठ प्रदर्शन करने का मनोबल मिलेगा। केन्या और कनाडा ने अब तक तीन-तीन मैच खेले हैं। तीनों में दोनों टीमों को करारी हार का सामना करना पड़ा है। इस ग्रुप में श्रीलंका,ऑस्ट्रेलिया,पाकिस्तान और न्यूजीलैंड जैसी मजबूत टीमों के अलावा एक अन्य कमजोर टीम जिम्बाब्वे भी है,लेकिन वह अपना खाता खोल चुका है। केन्या को अपने पहले ही मैच में न्यूजीलैंड के हाथों 10 विकेट से करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा था। इस हार ने उसके खिलाड़ियों का मनोबल इस कदर गिराया कि वह अगले मैच में पाकिस्तान से 205 रनों से पिट गया। इसके बाद रही-सही कसर श्रीलंका ने पूरी कर दी, जिसने उसे नौ विकेट से हराया। कनाडा ने हालांकि अपने पहले दो मैच बुरी तरह गंवाने के बाद तीसरे मैच में संघर्ष किया लेकिन अनुभव की कमी के कारण वह हार गया। उसे अपने पहले मैच में श्रीलंका से 210 रनों से करारी शिकस्त मिली थी। इसके बाद जिम्बाब्वे ने उसे 175 रनों से हराकर अपना खाता खोला। पाकिस्तान के खिलाफ उसने थोड़ा संघर्ष किया लेकिन अंत में उसे शाहिद अफरीदी के आगे घुटने टेक दिए। इस मैच में उसे 46 रनों से हार मिली। पाकिस्तान के खिलाफ कनाडा के प्रदर्शन को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि इस टीम में संभावनाएं हैं,लेकिन अनुभव की भारी कमी है। यही बात केन्या के साथ भी है। वैसे तो उसके पास कनाडा से ज्यादा अनुभवी खिलाड़ी हैं लेकिन संघर्षशक्ति के लिहाज से वह कनाडा से कमतर कहा जा सकता है। इस आकलन का यह अर्थ निकाला जा सकता है कि केन्या के खिलाफ कनाडा का पलड़ा थोड़ा भारी है लेकिन इसके बावजूद जीत के लिए उसे अपना श्रेष्ठ प्रदर्शन करना होगा। उसकी गेंदबाजी पाकिस्तान के खिलाफ अच्छी रही थी लेकिन बल्लेबाजों ने निराश किया था। केन्या की टीम अपने तीनों मुकाबलों में बल्लेबाजी विभाग में बुरी तरह नाकाम रही थी। जिन तीन मैचों में उसे खेलना पड़ा है,उनमें खेलने वाली टीमों की बल्लेबाजों की शक्ति को देखते हुए यह कहना उपयुक्त नहीं होगा कि उसके गेंदबाजों ने अब तक अपनी प्रतिभा के साथ न्याय किया है या नहीं, लेकिन इतना जरूर कहा जा सकता है कि इस मैच में केन्या का पास कनाडा को हराकर खाता खोलने का अच्छा मौका है।टीमें इस प्रकार हैं : केन्या : जिम्मी कामाण्डे, तन्मय मिश्रा, जेम्स नगोचे, शेम नगोचे, एलेक्स ओबान्दा, कोलिन्स ओबयुआ, डेविड ओबयुआ, नेहेमिया ओधियाम्बो, थॉमस ओडोयो, पीटर ओनगोन्डो, एलिजाह ओटिएनो, मौरिस औमा, राकेप पटेल, स्टीव टिकोलो और सेरेन वाटर्स। कनाडा : अशीष बगाई, रिजवान चीमा, हरवीर बैदवान, बालाजी राव, जॉन डेविडसन, पार्थ देसाई, टायसन गोर्डन, रविन्दू गुणासेकरा, जिम्मी हंसरा, खुर्रम चौहान, नीतीश कुमार, हेनरी ओसिन्दे, हीरल पटेल, जुबिन सरकारी, कार्ल व्हाटथम और हमजा तारिक।
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