जिला बदला, पर जिंदगी नहीं; जानिए जंगल में 'कैद' सोनहरी की कहानी

गणतंत्र दिवस के जश्न के बीच छत्तीसगढ़ के सोनहरी ग्राम पंचायत की हकीकत सवाल खड़े करती है. नया जिला बनने के बावजूद गांव में न पानी है, न बिजली, न मोबाइल नेटवर्क. सरकारी योजनाएं सिर्फ कागजों तक सीमित हैं. बीमारी में अस्पताल पहुंचना भी किसी संघर्ष से कम नहीं है.

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Chhattisgarh News: देश 77वें गणतंत्र दिवस के जश्न में डूबा हुआ है. हर प्रदेश, हर जिले, हर गांव और कस्बे में ध्वजा रोहण किया जा रहा है, लोग एक दूसरे को जमकर बधाई दे रहे हैं. लेकिन, आजादी के इतने साल बाद भी देश में कई गांव ऐसे हैं, जहां रहने वाले लोगों की उम्मीदें अब दम तोड़ रही हैं. ऐसा ही एक ग्राम पंचायत है छत्तीसगढ़ की सोनहरी जो घने जंगल के बीच बसी है. कुछ समय पहले इसका जिला बदला, लेकिन कहानी आज भी पहले जैसी ही है. पढ़िए NDTV ग्राउंड रिपोर्ट    

सोनहरी गांव पहले कोरिया जिले में शामिल था, लेकिन मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) के जिला बनने के बाद सोनहरी को इसी जिले में शामिल कर दिया गया. जिला मुख्यालय मनेंद्रगढ़ से करीब 50 किलोमीटर दूर घने जंगलों के बीच बसे इस गांव का जिला तो बदला, लेकिन गांव और यहां रहने वाले लोगों की जिंदगी में कोई बदलाव नहीं आया. गांव की हालात जानने के लिए NDTV की टीम गांव में पहुंची तो वहां के लोगों के चेहरे पर नाराजगी, बेबसी और उपेक्षा का दर्द साफ दिखाई दे रहा था.  

'हमारा सिर्फ जिला बदला है, जिंदगी नहीं' 

एनडीटीवी की टीम ने गांव में रहने वाले बहादुर ने बात की. इस दौरान पहली उन्होंने जो कही उसने पूरी कहानी बयां कर दी. बहादुर ने कहा कि हमारा सिर्फ जिला बदला है, जिंदगी नहीं. ऐसा लगता है जैसे सरकारी योजनाएं उनके लिए नहीं, किसी और दुनिया के लिए बनी हैं. लोगों को आवास योजना, आयुष्मान कार्ड समेत अन्य योजनाओं का भी लाभ नहीं मिल रहा है. चुनाव के बाद से विधायक एक बार भी हाल पूछने नहीं आए. 

न पानी और न ही बिजली 

गांव का मुआयना करने पर हैरान करने वाली चीजें सामने आईं. गांव में नल-जल योजना आधी-अधूरी है, कुछ जगह पाइपलाइन पहुंची है. गांव में पानी के लिए तरसती आंखें और सूखे घड़े दिखाई देते हैं, बिजली व्यवस्था भी कागजों में ज्यादा और जमीन पर कम नजर आती है. कहीं खंभे लगे हैं, कहीं यह भी नहीं हैं.  

बड़ी समस्या मोबाइल नेटवर्क

गांव में रहने वाले प्रेमसाय ने सबसे बड़ी समस्या मोबाइल नेटवर्क की बातते हैं. वे कहते हैं अगर, कभी कोई बीमार पड़ जाए तो एंबुलेंस बुलाने के लिए भी लोगों को कई किलोमीटर पैदल चलकर नेटवर्क ढूंढना पड़ता है. ऐसे में कई बार देर हो जाती है और मरीज दम तोड़ देते हैं. 

अस्पताल जाना एक संघर्ष

महिला बॉबी ने बताया कि अस्पताल की सुविधाएं नहीं हैं, इस कारण गांव वालों को दूर के कस्बों पर निर्भर रहना पड़ता है और वहां तक पहुंचना भी एक संघर्ष है. मरीजों को कभी साइकिल पर, कभी हाथ पकड़कर पैदल अस्पताल ले जाना पड़ता है. 

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नया जिला बनने से उम्मीद थी 

गांव वालों का कहना है कि नया जिला बनने से उन्हें उम्मीद थी कि विकास की कोई किरण पहुंचेगी, लेकिन सोनहरी आज भी उसी अंधेरे में खड़ा है, जहां लोग सुविधाओं के लिए नहीं, बल्कि सिर्फ उम्मीद के सहारे अपनी जिंदगी ढो रहे हैं.  
 

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