Relationship Tips: प्रेमानंद महाराज ने समझाया क्या है प्यार? क्या GEN-Z को समझ आएगी प्यार की भाषा

Relationship Advice: आज के समय में प्यार को अक्सर आकर्षण, पसंद और रिश्ते से जोड़कर देखा जाता है. लेकिन क्या हर आकर्षण को प्रेम कहा जा सकता है. सत्संग में एक श्रद्धालु ने प्रेमानंद महाराज से पूछा कि असली प्रेम क्या है, उसका उद्देश्य क्या है और प्रेम कब प्राप्त होता है. इस पर महाराज ने प्रेम और मोह, आसक्ति व स्वार्थ के बीच का अंतर समझाया.

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प्रेमानंद महाराज ने समझाया प्यार का अर्थ
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आज की GEN-Z के दौर में प्यार की परिभाषा अक्सर पसंद, आकर्षण, डेटिंग और रिलेशनशिप तक सीमित नजर आती है. लेकिन क्या किसी के रूप, व्यवहार या साथ से प्रभावित होना ही सच्चा प्यार है. सत्संग में जब एक श्रद्धालु ने प्रेमानंद महाराज से प्रेम का असली अर्थ और उसके उद्देश्य के बारे में पूछा तो उन्होंने प्रेम, मोह और आसक्ति के बीच साफ अंतर बताया. महाराज ने बताया कि जहां स्वार्थ जुड़ा हो, वहां प्रेम नहीं होता है. सच्चा प्रेम वह है जिसमें सामने वाले की खुशी और भलाई को अपनी इच्छा से ऊपर रखा जाए. ऐसे में उनका बताया प्रेम का अर्थ आज की पीढ़ी के रिश्तों को एक नई नजर से समझने का मौका देता है.

प्रेम में स्वार्थ की कोई जगह नहीं

प्रेमानंद महाराज ने बताया कि किसी व्यक्ति के रूप, धन, पद, शरीर या प्रभाव से प्रभावित होकर उससे अपनी इच्छा पूरी करने की चाह रखना प्रेम नहीं है. इसे काम, राग, आसक्ति, मोह या स्वार्थ कहा जा सकता है. सच्चे प्रेम में अपनी खुशी से ज्यादा सामने वाले की खुशी महत्वपूर्ण होती है.

प्रेमानंद महाराज ने बताया कि नाम जप, भगवान की शरण, उनकी लीला-कथा सुनना, भगवत सेवा और परोपकार जैसे कार्यों से हृदय में दिव्य प्रेम का भाव विकसित हो सकताा है. प्रेम में तृप्ति नहीं होती, बल्कि प्रियतम के प्रति लगाव और समर्पण लगातार बढ़ता जाता है.

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