चार साल बाद इन अग्निवीरों को नहीं भेजा जाता है घर, जानें कैसे होता है सेलेक्शन

Agniveer Permanent Selection Process: अग्निपथ योजना के तहत भर्ती हुए सभी अग्निवीर चार साल बाद घर नहीं जाते हैं. इनमें से कुछ को इंडियन आर्मी, एयरफोर्स और नेवी में परमानेंट नौकरी का मौका मिलता है. जानिए किन अग्निवीरों का सेलेक्शन होता है और पूरी प्रक्रिया क्या है.

विज्ञापन
Read Time: 4 mins
अग्निवीरों की भर्ती कैसे होती है

Agniveer Permanent Selection Process: अग्निपथ योजना में शामिल होने से पहले हर कैंडिडेट के मन में सबसे बड़ा सवाल रहता है कि चार साल पूरे होने के बाद क्या होगा. क्या चार साल की सर्विस पूरी होने के बाद घर भेज दिया जाएगा या फिर सेना में आगे भी मौका भी मिलेगा. दरअसल, अग्निपथ योजना के तहत भर्ती हुए सभी अग्निवीर चार साल बाद बाहर नहीं किए जाते हैं. सरकार और तीनों सेनाओं की पॉलिसी के अनुसार, कुछ अग्निवीरों को उनके प्रदर्शन के आधार पर परमानेंट कैडर में शामिल होने का मौका दिया जाता है. यह सेलेक्शन पूरी तरह नियमों और सख्त प्रक्रिया के तहत होता है. आइए जानते हैं चार साल बाद किन अग्निवीरों को घर नहीं भेजा जाता, उनका सेलेक्शन कैसे होता है, किन बातों को सबसे ज्यादा महत्व दिया जाता है और जो अग्निवीर चयनित नहीं होते, उनके लिए आगे क्या ऑप्शन होते हैं.

अग्निपथ योजना क्या है

अग्निपथ योजना को केंद्र सरकार ने साल 2022 में शुरू किया था. इस योजना के तहत 17.5 से 21 साल की उम्र के युवाओं को चार साल के लिए भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना में भर्ती किया जाता है. इस योजना के तहत चुने गए जवानों को अग्निवीर कहा जाता है. सरकार का मकसद है कि सेना को ज्यादा युवा, फिट और तकनीक के साथ काम करने वाला बनाया जाए. चार साल की सेवा के दौरान अग्निवीरों को ट्रेनिंग, अनुशासन और हाईटेक हथियारों के साथ काम करने का अनुभव मिलता है.

क्या चार साल बाद सभी अग्निवीर घर भेज दिए जाते हैं

चार साल पूरे होने के बाद सभी अग्निवीरों को घर नहीं भेजा जाता है. करीब 75% अग्निवीरों की ही सर्विस खत्म हो जाती है, लेकिन 25% अग्निवीरों को स्थायी कैडर में शामिल होने का मौका दिया जाता है. हालांकि ये कोई अधिकार नहीं होता, बल्कि पूरी तरह चयन प्रक्रिया पर निर्भर करता है. सरकार और तीनों सेनाएं अपनी जरूरत के हिसाब से तय करती हैं कि किस बैच से कितने अग्निवीरों को आगे रखा जाएगा.

चार साल बाद किन अग्निवीरों को घर नहीं भेजा जाता है

जो अग्निवीर चार साल की सेवा के दौरान हर स्तर पर बेहतर प्रदर्शन करते हैं, उन्हीं को परमानेंट नौकरी का मौका मिलता है. इसमें उनकी ड्यूटी परफॉर्मेंस, डिसिप्लिन, फिटनेस, मेडिकल रिकॉर्ड और बिहेवियर को ध्यान में रखा जाता है. सेना यह भी देखती है कि अग्निवीर ने तकनीकी काम, हथियार संचालन और टीमवर्क में कितना अच्छा प्रदर्शन किया है. इन्हीं आधारों पर एक सेंट्रल बोर्ड के जरिए सेलेक्ट किया जाता है.

अग्निवीरों का सेलेक्शन कैसे होता है?

चार साल की सेवा पूरी होने के बाद अग्निवीरों को स्थायी कैडर के लिए आवेदन करने का मौका दिया जाता है. इसके बाद एक पारदर्शी प्रक्रिया के तहत उनका मूल्यांकन किया जाता है. इस प्रक्रिया में किसी भी अग्निवीर को यह गारंटी नहीं होती कि उसका चयन जरूर होगा. सरकार साफ कर चुकी है कि स्थायी भर्ती पूरी तरह संगठन की जरूरत और नीति पर निर्भर करती है.

जो अग्निवीर चयनित नहीं होते, उनके पास क्या ऑप्शन हैं

जो अग्निवीर स्थायी कैडर में नहीं चुने जाते, उन्हें पूरी तरह खाली हाथ नहीं छोड़ा जाता है. सरकार ने साफ किया है कि ऐसे अग्निवीरों को CAPF, असम राइफल्स, राज्य पुलिस और अन्य सुरक्षा बलों में प्राथमिकता दी जाएगी. इसके अलावा अग्निवीरों को कानून व्यवस्था, मैकेनिक्स, इंजीनियरिंग और टेक्निकल फील्ड का एक्सपीरिएंस, जो आगे नौकरी पाने में मदद करता है. बड़ी कंपनियां और कई PSUs अनुशासित और प्रशिक्षित अग्निवीरों को नौकरी में प्रॉयरिटी देती हैं.

Advertisement

Google में कैसे मिलती है नौकरी? ये रहा स्टेप बाय स्टेप प्रोसेस

Featured Video Of The Day
Noida Techie Yuvraj Mehta Death: इंजीनियर युवराज की मौत के मामले में बिल्डर अभय गिरफ्तार | BREAKING