देशभर में दशहरे के दिन ही रावण का दहन किया जाता है और यह परंपरा सदियों से चली आ रही है. इसे बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है. लेकिन 20 अक्टूबर 2026 को रावण दहन के समय को लेकर सवाल उठ रहे हैं. दरअसल, इस बार दशहरा मंगलवार के दिन पड़ा है. आचार्य मदनमोहन ने बताया कि शास्त्रों में मंगलवार को रावण दहन करना उचित नहीं माना गया है. ऐसे में रावण को मंगलवार की रात 12 बजे के बाद यानी बुधवार शुरू होने पर दहन करना सही है. आइए जानते हैं कि आचार्य मदनमोहन ने इसके पीछे क्या धार्मिक मान्यता बताई है.
मंगलवार को रावण दहन करना क्यों है अशुभ
आचार्य मदनमोहन ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मंगलवार को रावण दहन करना उचित नहीं माना गया है. उन्होंने निर्णय सिंधु ग्रंथ के पृष्ठ संख्या 234 का उल्लेख किया है. साथ ही कहा कि इसमें लिखा है कि मंगलवार के दिन रावण दहन से बचना चाहिए. मंगलवार की रात 12 बजे के बाद बुधवार शुरू हो जाएगा. ऐसे में आचार्य के अनुसार, 20 अक्टूबर की रात 12 बजे के बाद यानी 21 अक्टूबर की शुरुआत में रावण दहन किया जाएगा. उन्होंने इस समय के संदर्भ में धनिष्ठा नक्षत्र, वाणिज्य करण और गंड योग का उल्लेख किया है. साथ ही, चंद्रमा के मकर राशि और सूर्य के तुला राशि में होने की बात भी कही है. हालांकि, रावण दहन का वास्तविक समय शहर, स्थानीय पंचांग और आायोजन की परंपरा के अनुसार अलग हो सकता है. इसलिए इसे सभी जगहों के लिए एक समान शुभ मुहूर्त नहीं मानना चाहिए.
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मंगलवार को विसर्जन नहीं होती मूर्ति
आचार्य मदनमोहन ने कहा कि मंगलवार को मूर्ति विसर्जन भी नहीं होती है. हालांकि, अलग-अलग धार्मिक आयोजनों और क्षेत्रीय परंपराओं में विसर्जन के नियम अलग हो सकते हैं. इसलिए अपने इलाके में होने वाले आयोजन के समय की पुष्टि स्थानीय पंचांग या आयोजकों से करना बेहतर रहेगा.
दशहरे पर क्यों किया जाता है रावण दहन
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विजयादशमी के दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध किया था. इसी की याद में रावण दहन किया जााता है. यह पर्व अहंकार, अन्याय और बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देता है.
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