दशहरा यानी विजयादशमी का त्योहार 20 अक्टूबर मंगलवार को मनाया जा रहा है. यह पर्व बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की जीत का प्रतीक माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध किया था. वहीं, मां दुर्गा की महिषासुर पर विजय के कारण भी इस दिन का विशेष महत्व है. दशहरे पर रावण दहन, शमी वृक्ष की पूजा और दान-पुण्य जैसी परंपराएं निभाई जाती हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि रावण दहन के बाद क्या करना चाहिए और किन कामों से बचने की सलाह दी जाती है. आइए जानते हैं दशहरे से जुड़ी जरूरी मान्यताएं.
रावण दहन के बाद बची राख को लेकर क्या है मान्यता?
जानकारी के अनुसार, धार्मिक परंपरा में रावण को अहंकार और अधर्म का प्रतीक माना जाता है. रावण दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देता है. कुछ मान्यताओं के अनुसार, दहन के बाद बची राख को घर में लाने से बचना चाहिए. हालांकि, राख घर में रखने से दुर्भाग्य आाता है इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. अलग-अलग क्षेत्रों में इस बारे में अलग-अलग परंपरााएं प्रचलित हैं.
दशहरे पर क्या करना माना जाता है शुभ?
शमी वृक्ष की पूजा: विजयादशमी पर शमी के पेड़ की पूजा करना शुभ माना जाता है. परंपरा के अनुसार, शमी की पत्तियां प्रियजनों को देकर सुख-समृद्धि की कामना की जाती है.
दान-पुण्य करें: इस दिन अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों को अनाज, कपड़े या अन्य जरूरी सामान दाान कर सकते हैं. धार्मिक मान्यताओं में दान को पुण्य का काम माना गया है.
शस्त्र और औजारों की पूजा: कई परिवारों में दशहरे पर शस्त्रों, वाहनों और काम में इस्तेमाल होने वाले औजारों की पूजा की जाती है. यह परंपरा काम और साधनों के प्रति सम्मान जतानने से जुड़ी है.
नई चीजें खरीदें: कई लोग विजयादशमी पर सोना-चांदी या घर के लिए नई वस्तुएं खरीदना शुभ मानते हैं. हालांकि, खरीदारी करनाा जरूरी नहीं है और इससे आर्थिक लाभ की गारंटी नहीं मिलती है.
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दशहरे पर किन कामों से बचना चाहिए?
- पेड़-पौधों और जीवों को नुकसान न पहुंचाएं: त्योहार मनाते समय पर्यावरण और जीव-जंतुओं की सुरक्षा का ध्याान रखें.
- विवाद और अपमान से बचें: दशहरे का संदेश बुराई पर अच्छाई की जीत है. इसलिए दूसरों से सम्मानपूर्वक व्यवहार करें और क्रोध, अहंकार व झगड़े से दूर रहने का प्रयाास करें.
- खानपान में परंपराओं का ध्यान रखें: कई परिवार इस दिन सात्विक भोजन करते हैं और मांस-मदिरा से परहेज करते हैं. यह परिवाार और क्षेत्र की धार्मिक परंपराओं पर निर्भर करताा है.
दशहरे का क्या है असली संदेश?
विजयादशमी केवल रावण दहन का पर्व नहीं है, बल्कि अपने भीतर की बुराइयों को पहचानकर उन्हें दूर करने की प्रेरणा भी देता है. इस दिन अहंकार, क्रोध और झूठ जैसी आदतों को छोड़ने तथा प्रेम, सत्य और सदाचार अपनााने का संकल्प लिया जा सकता है.
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