कितनी पढ़ी-लिखी हैं पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी? ऐसे हुई राजनीतिक करियर की शुरुआत

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एक सादगी पसंद, लेकिन बेहद पढ़ी-लिखी नेता हैं. उन्होंने इतिहास, इस्लामिक इतिहास, एजुकेशन और कानून तक की पढ़ाई की है. उन्हें मानद डॉक्टरेट की उपाधि भी मिल चुकी है. वह तीन बार से राज्य की सीएम हैं.

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ममता बनर्जी की एजुकेशन

Mamata Banerjee Education: इस साल पश्चिम बंगाल में चुनाव होने हैं. इससे पहले ही SIR, IPAC दफ्तर में ईडी की छापेमारी समेत कई मुद्दों को लेकर TMC चीफ और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सुर्खियों में हैं. फायरब्रांड नेता के तौर पर पहचान रखने वाली ममता दीदी काफी तेज-तर्रार हैं. उन्होंने 15 साल की उम्र में ही राजनीति में कदम रख दिया था. अपने स्पीच से विरोधियों को चारों खाने चित करने वाली ममता बनर्जी पॉलिटिक्स ही नहीं पढ़ाई में भी कई बड़े नेताओं से काफी आगे हैं. उनका राजनीति में आना किसी प्लान का हिस्सा नहीं, बल्कि जुनून का नतीजा था. आइए जानते हैं वह कितनी पढ़ी-लिखी हैं और उनकी राजनीति में एंट्री कैसे हुई.

ममता बनर्जी की शुरुआती जिंदगी

ममता बनर्जी का जन्म 5 जनवरी 1955 को कोलकाता में हुआ. वह एक मिडिल क्लास बंगाली हिंदू परिवार से आती हैं. 17 साल की उम्र में इलाज की कमी के कारण उनके पिता का निधन हो गया. घर की जिम्मेदारी और हालात मुश्किल थे, लेकिन ममता ने पढ़ाई और हौसले को कभी कमजोर नहीं पड़ने दिया.

ममता बनर्जी कितनी पढ़ी-लिखी हैं?

ममता बनर्जी सिर्फ फायरब्रांड नेता नहीं, बल्कि अच्छी-खासी पढ़ी-लिखी शख्सियत हैं. 1970 में उन्होंने देशबंधु शिशु शिक्षालय से हायर सेकेंडरी की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद जोगमाया देवी कॉलेज से इतिहास में बैचलर डिग्री हासिल की. उनके पास कलकत्ता विश्वविद्यालय से इस्लामिक इतिहास में मास्टर डिग्री भी है.

पोस्ट ग्रेजुएशन के बाद ममता बनर्जी ने श्री शिक्षायतन कॉलेज से बीएड किया और जोगेश चंद्र चौधरी लॉ कॉलेज से लॉ डिग्री ली. उन्हें कलिंग इंस्टीट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी, भुवनेश्वर से मानद डॉक्टरेट और कलकत्ता विश्वविद्यालय से डीलिट (Doctor of Literature) की उपाधि भी मिल चुकी है.

15 साल की उम्र में राजनीति में एंट्री

बहुत कम लोग जानते हैं कि ममता बनर्जी ने सिर्फ 15 साल की उम्र में राजनीति में कदम रख दिया था. कॉलेज के दिनों में ही उन्होंने छात्र राजनीति में हिस्सा लिया और छात्र परिषद यूनियन बनाई. यहीं से उनके तेवर और नेतृत्व की झलक दिखने लगी. ममता ने अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत कांग्रेस पार्टी से की.

1975 में उन्हें पश्चिम बंगाल में महिला कांग्रेस का जनरल सेक्रेटरी बनाया गया, लेकिन जल्द ही पार्टी के भीतर मतभेद बढ़े. इसके बाद ममता ने बड़ा फैसला लिया और तृणमूल कांग्रेस (TMC) की नींव रखी. यही फैसला आगे चलकर बंगाल की राजनीति का गेमचेंजर साबित हुआ.

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