Civil Service Exam CSAT Syllabus: सिविल सेवा परीक्षा में CSAT पेपर को जोड़े जाने के बाद से ही विवाद बना रहा है. इसके खिलाफ 2013-14 में छात्रों का एक बड़ा आंदोलन हुआ, जिसके बाद इसे एक क्वालीफाइंग पेपर बना दिया गया. हालांकि प्रश्नपत्र के कठिन स्तर और इसमें अंग्रेजी को वरीयता दिए जाने को लेकर गैर अंग्रेजी भाषी छात्रों की ओर से समय-समय पर चिंता जताई जाती रही है. अब संसदीय समिति की तरफ से CSAT पेपर के पाठ्यक्रम को तर्कसंगत बनाने की सिफारिश की गई है. इसके साथ ही ये भी बताया गया है कि इसमें क्या-क्या चीजें जरूरी हैं.
बराबरी का कॉम्पिटिशन जरूरी
सिविल सेवा परीक्षा को लेकर कार्मिक मंत्रालय से जुड़ी संसद की स्थाई समिति ने अपनी 160वीं रिपोर्ट में इस बात की सिफारिश की है कि CSAT पेपर के स्वरूप को तर्कसंगत बनाया जाए. बीजेपी सांसद और पूर्व आईपीएस अधिकारी बृजलाल की अध्यक्षता वाली इस समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि भावी सिविल सेवकों में विश्लेषणात्मक योग्यता, समझ और निर्णय लेने संबंधी कौशल का आकलन करना जरूरी है, लेकिन परीक्षा में बराबरी की प्रतिस्पर्धा भी जरूरी है.
गैर अंग्रेजी भाषी छात्रों को नुकसान
समिति का मानना है कि CSAT पेपर का वर्तमान स्वरूप और पाठ्यक्रम विज्ञान विषय की पृष्ठभूमि से नहीं आने वाले छात्रों के लिए प्रतिकूल और नुकसानदायक साबित हो रहा है. खासकर वैसे छात्र जो सुदूर इलाकों से ताल्लुक रखते हैं, जहां सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी की उतनी अच्छी सुविधा उपलब्ध नहीं है. इसलिए समिति ने सिफारिश की है कि CSAT पेपर के वर्तमान स्वरूप और पाठ्यक्रम को तर्कसंगत बनाने के लिए यूपीएससी को व्यापक समीक्षा करनी चाहिए. इससे प्रारंभिक परीक्षा में अलग-अलग अकादमिक स्ट्रीम के परीक्षार्थियों के लिए एक निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित हो सकेगी.
अब परीक्षा में शरीक होने वाले हिंदी और गैर अंग्रेजी भाषी छात्रों की ये पुरानी शिकायत रही है कि CSAT के प्रश्नों में अंग्रेजी भाषा को वरीयता दी जाती है और उसके हिंदी या दूसरे गैर अंग्रेजी भाषा में अनुवाद में कई बार कठिनाई आती है. साथ ही, कठिनता के स्तर में भी काफी भिन्नता होती है.
इंग्लिश मीडियम के पक्ष में है CSAT
सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी से सालों से जुड़े रहे विशेषज्ञ सुजीत सिंह ने एनडीटीवी को बताया कि क्वालीफाइंग पेपर होने के बावजूद इसका स्वरूप ऐसा है जो शहरी और अंग्रेजी भाषा से पढ़े छात्रों के पक्ष में है . सुजीत सिंह ने कहा कि यूपीएससी को इस बात का आंकड़ा जारी करना चाहिए कि CSAT पेपर लागू करने के पहले, उसे लागू करने के बाद और फिर उसे क्वालीफाइंग पेपर बनाने के बाद कितने हिंदी भाषी या गैर अंग्रेजी माध्यम से परीक्षा देने वाले छात्र प्रारंभिक परीक्षा में उत्तीर्ण हो पाए.
समिति ने यूपीएससी से ये भी जानकारी मांगी है कि प्रारंभिक परीक्षा संपन्न होने के बाद मॉडल उत्तर कुंजी जारी करने की उसकी क्या नीति है और उसकी क्या समय सीमा तय की है. समिति का मानना है कि ये परीक्षा की पारदर्शिता और उसमें छात्रों का विश्वास बढ़ाने के लिए ये बेहद जरूरी है. यूपीएससी ने समिति को बताया कि इसके लिए एक नीति बनाई गई है जिस सिविल सेवा परीक्षा 2026 से लागू किया जाएगा. समिति ने नए नीति का ब्योरा मांगा है.
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