Success Story: शादी से ठीक पहले घर छोड़कर भागी, 7 साल बाद PCS अफसर बनकर लौटी; फिल्मी है संजू रानी की ये कहानी

Sanju Rani Verma Inspirational Story: संजू रानी वर्मा ने 2013 में घर छोड़कर अपने सपनों की राह चुनी. परिवार और समाज के दबाव के बावजूद उन्होंने पढ़ाई जारी रखी और ट्यूशन पढ़ाकर, पार्ट-टाइम जॉब करके आज पीसीएस अधिकारी हैं. पढ़िए सक्सेस स्टोरी..

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कमाल की है ये सक्सेस स्टोरी

Sanju Rani Verma Inspirational Story: सपनों को पूरा करने के लिए कभी-कभी हमें अपने कम्फर्ट जोन को छोड़ना पड़ता है. संजू रानी वर्मा की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. साल 2013 में उन्होंने थोड़े पैसे और बड़े हौसले के साथ घर छोड़ा. समाज और परिवार का दबाव उनके सामने था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और आज संजू PCS अधिकारी हैं. UPPSC क्लियर कर चुकीं संजू अपनी मेहनत से कई लड़कियों के लिए इंस्पिरेशन हैं. पढ़िए उनकी सक्सेस स्टोरी..

घर छोड़ना पड़ा, लेकिन सपना नहीं छोड़ा

मेरठ की रहने वाली संजू की फैमिली में महिलाओं को पढ़ाई में ज्यादा बढ़ावा नहीं मिलता था. उन्होंने किसी तरह पहले RG डिग्री कॉलेज से ग्रेजुएशन पूरा किया, लेकिन पोस्ट-ग्रेजुएशन के दौरान उनकी मां का निधन हो गया. परिवार चाहता था कि वह पढ़ाई छोड़कर शादी कर लें, लेकिन संजू ने उनके आगे हार नहीं मानी और अपने सपनों को पूरा करने के लिए घर छोड़ दिया. हालांकि, उनका यह फैसला काफी मुश्किलों भरा था और उन्हें सक्सेस पाने के लिए काफी स्ट्रगल करना पड़ा.

दिन में काम, रात में पढ़ाई

घर छोड़ने के बाद संजू ने एक छोटा सा कमरा किराए पर लिया. उन्होंने ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया और लोकल संस्थानों में पार्ट-टाइम जॉब की. दिनभर काम, रात में पढ़ाई करती थीं. उन्होंने अपनी हर छोटी कमाई किताबों और किराए पर लगाई. स्ट्रगल काफी ज्यादा और कठिन था. कई बार डर भी लगता और खुद की सफलता को लेकर संदेह भी होता, लेकिन उन्हेंने कभी भी अपना फोकस  UPPSC से नहीं हटाया.

2018 में UPPSC क्लियर

सालों की कठिन मेहनत के बाद 2018 में UPPSC का रिजल्ट आया. संजू ने परीक्षा पास की और कॉमर्शियल टैक्स ऑफिसर बन गईं. जो लड़की कभी घर छोड़ कर भागी थी, अब अधिकारी बन चुकी थी. 35 साल की उम्र में संजू का लक्ष्य अब सिविल सर्विसेज है. वह डिविजनल मजिस्ट्रेट बनना चाहती हैं. उनके लिए सफलता का मतलब सिर्फ पद नहीं, जिम्मेदारी और समाज में गरिमा है. वह अपने घर वालों की मदद भी करना चाहती हैं. उनका मानना है कि सम्मान और जिम्मेदारी कभी शर्तों पर निर्भर नहीं होना चाहिए.

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