- केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि UGC और NCERT विवादों से बचा जा सकता था
- शिक्षा मंत्री ने कहा कि यूजीसी मामला SC के संज्ञान में है और वे इस पर सार्वजनिक टिप्पणी नहीं करेंगे
- प्रधान ने आश्वस्त किया कि सरकार किसी भी प्रकार के भेदभाव या उत्पीड़न का समर्थन नहीं करती है
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) के समानता नियमों और एनसीईआरटी (राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद) पाठ्यपुस्तक में न्यायिक भ्रष्टाचार पर टिप्पणियों को लेकर हाल में उपजे विवादों के बारे में कहा कि इनसे बचा सकता था. प्रधान ने शुक्रवार को एक कार्यक्रम के दौरान इस बात पर जोर दिया कि सरकार किसी के खिलाफ भेदभाव का समर्थन नहीं करती. उन्होंने कहा कि मैं स्वीकार करता हूं कि इनसे बचा जा सकता था, खासकर जिस तरह से उन्हें प्रस्तुत किया गया था.
UGC मामला अदालत में है, मैं टिप्पणी नहीं करूंगा
शिक्षा मंत्री ने कहा कि यूजीसी मामले पर समाज में चर्चा विचाराधीन है और उच्चतम न्यायालय के संज्ञान में है, इसलिए मैं सार्वजनिक रूप से टिप्पणी नहीं कर सकता लेकिन मैं नागरिकों को आश्वस्त करना चाहता हूं कि हम किसी के खिलाफ उत्पीड़न का समर्थन नहीं करते. यह सुनिश्चित करना सरकार का संवैधानिक कर्तव्य है कि किसी भी प्रकार का भेदभाव न हो. यह न्यायालय के संज्ञान में है. जैसा अदालत तय करेगी, सरकार संविधान के अनुसार प्रणाली को लागू करेगी.
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मंत्री ने एनसीईआरटी मुद्दे के बारे में कहा कि न्यायालय ने इस मामले पर कुछ मार्गदर्शन प्रदान किया है. यह कहा गया है कि उसकी देखरेख में तैयार अध्याय जोड़ा जाएगा और हम उस काम में लगे हुए हैं. एक समिति भी गठित की गई है. न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा के नेतृत्व में तीन सदस्यीय समिति बनी है, जिसमें भारत के एक पूर्व अटॉर्नी जनरल और एक प्रतिष्ठित शिक्षाविद् भी शामिल हैं.
काम चल रहा है और अध्याय तैयार किया जा रहा
प्रधान ने कहा कि अदालत ने भोपाल विधि अकादमी को भी शामिल करने के लिए कहा था. यह सब काम चल रहा है और अध्याय तैयार किया जा रहा है. इसे अदालत के समक्ष रखा जाएगा और तदनुसार जोड़ा जाएगा. इस महीने की शुरुआत में, एनसीईआरटी ने पाठ्यपुस्तक में न्यायिक भ्रष्टाचार पर एक अध्याय शामिल करने के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगी थी.
एनसीईआरटी ने घोषणा की थी कि पूरी पाठ्यपुस्तक वापस ले ली जाएगी. कक्षा आठ की सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक में कहा गया था कि भ्रष्टाचार, बड़े पैमाने पर लंबित मामले और पर्याप्त संख्या में न्यायाधीशों की कमी न्यायिक प्रणाली के सामने आने वाली चुनौतियों में से हैं. अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के छात्रों के खिलाफ भेदभाव को रोकने के लिए जनवरी 2026 में अधिसूचित यूजीसी (उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा) नियमन, 2026 पर उच्चतम न्यायालय ने रोक लगा दी थी.
इनपुट- भाषा