'बच्चों को पढ़ाना है तो एक्सपर्ट तो लाइए', NCERT किताब छापने की प्रक्रिया पर सुप्रीम कोर्ट खफा

Supreme Court NCERT Book: सुप्रीम कोर्ट ने NCERT किताबों को लेकर सख्त टिप्पणी करते हुए सरकार को एक एक्सपर्ट कमेटी बनाने का निर्देश दिया है, जिसमें तीन अलग-अलग क्षेत्रों के दिग्गज शामिल होंगे.

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Supreme Court NCERT Book

Supreme Court NCERT Book: NCERT की किताब में शामिल न्यायालयों में भ्रष्टाचार वाले चैप्टर पर सुप्रीम कोर्ट किसी भी तरह की माफी के मूड में नहीं है. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है और उन लोगों को सिस्टम से बाहर करने के लिए कहा है, जो इस चैप्टर को अप्रूव करने के लिए जिम्मेदार हैं. इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने NCERT कैरिकुलम बनाने वाली कमेटी में शामिल एक्सपर्ट्स की कमी पर भी नाराजगी जताई. कोर्ट ने साफ कहा कि अगर आप छात्रों को ज्युडिशियरी के बारे में पढ़ाना ही चाहते हैं तो उन्हें जाने-माने न्यायविदों और एक्सपर्ट्स का तैयार किया गया कंटेंट ही पढ़ाएं. 

सरकार को कमेटी बनाने का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने NCERT कमेटी को लेकर टिप्पणी करते हुए कहा कि हमें यह देखकर निराशा हुई है कि कमेटी में एक भी मशहूर न्यायविद (Jurist) शामिल नहीं है. साथ ही, NCERT के डायरेक्टर के रवैये से भी हमें काफी चिंता हुई है. कोर्ट ने कहा है कि दोबारा चैप्टर लिखे जाने के बाद इसे तब तक पब्लिश नहीं किया जाएगा जब तक एक्सपर्ट्स की कमेटी इसे मंजूरी न दे. इसके लिए सरकार को एक एक्सपर्ट कमेटी बनाने का निर्देश दिया गया है. जिसमें ये तीन लोग शामिल होने जरूरी हैं - 

  • एक पूर्व सीनियर जज
  • एक प्रसिद्ध शिक्षाविद् (Academician)
  • कानून के क्षेत्र के एक मशहूर जानकार 

NCERT की किताबें बनने का प्रोसेस

नेशनल केरिकुलम फ्रेमवर्क (NCF) के तहत NCERT की किताबें तैयार होती हैं. यही तय करता है कि किताबों में शामिल कंटेंट क्या होगा और कैसा होगा. इसके बाद हर क्लास और सब्जेक्ट का सिलेबस तैयार किया जाता है. 

कैसे लिखी जाती हैं किताबें?

NCERT की किताबों को लिखने के लिए टेक्स्टबुक डेवलेपमेंट कमेटीज यानी TDCs होती हैं. इन कमेटियों में यूनिवर्सिटी प्रोफेसर, शिक्षणशास्त्र (Pedagogy) एक्सपर्ट, टॉपिक एक्सपर्ट और NCRT के अधिकारी शामिल होते हैं. इन सभी की निगरानी में ही किताबें लिखी जाती हैं और सिलेबस तैयार किया जाता है. इस कमेटी का काम होता है कि किताबों में शामिल होने वाली चीजें पूरी तरह से तथ्यात्मक और बैलेंस रहें. उनमें किसी भी धर्म विशेष या फिर समुदाय को लेकर कोई ऐसी बात न लिखी हो, जिससे भावनाएं आहत हों. इसके अलावा इतिहास की चीजों से भी छेड़छाड़ होने से बचा जाता है. 

कई लेयर्स में होता है रिव्यू

NCERT की किताबें छपने से पहले उन्हें कई लेयर्स के रिव्यू सिस्टम से गुजरना पड़ता है. सबसे पहले इसका ड्राफ्ट तैयार होता है, उसके बाद इंटरनल अकेडमिक जांच होती है. इसके बाद बाहरी एक्सपर्ट्स इसका रिव्यू करते हैं. इसके बाद ही किताबों को पब्लिश होने के लिए प्रिंटिंग प्रेस में भेजा जाता है. 

इससे पहले विवाद के बीच NCERT अधिकारियों ने बताया था कि क्लास 8 की NCERT सोशल साइंस किताब के चैप्टर को अप्रूव करने वाली कमेटी में एक वकील भी शामिल था. हालांकि किताब का लीगल रिव्यू नहीं कराया गया था, क्योंकि ऐसा कोई प्रावधान नहीं है. 

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