Success Story: स्कूल के बाद कई सालों की मेहनत के बाद लोगों को 20 या 30 लाख रुपये का पैकेज मिलता है. भारत में पहली नौकरी में इतना पैकेज मिलने पर लोग काफी खुश भी हो जाते हैं और तुरंत इसे एक्सेप्ट भी कर लेते हैं. हालांकि भारतीय मूल के एक युवा ने कुछ ऐसा किया कि आज उसकी हर तरफ तारीफ हो रही है. उन्हें एक वेंचर की तरफ से 2.8 करोड़ सैलरी पैकेज का ऑफर दिया गया, लेकिन उन्होंने इसे ठुकरा दिया. सबसे खास बात ये है कि वो इस दौरान हाई स्कूल में पढ़ रहे थे. अब इसी युवा ने अपनी खुद की कंपनी खड़ी कर दी है और करोड़ों रुपये कमा रहे हैं.
स्कूल छोड़ने की शर्त पर मिला था ऑफर
अमेरिका के मैरीलैंड में रहने वाले रुद्रोजस कुंवर (Rudrojas Kunvar) को 3 लाख डॉलर (करीब 2.8 करोड़ रुपये) का भारी-भरकम ऑफर मिला था, जिसे उन्होंने ठुकरा दिया. यह ऑफर उन्हें इस शर्त पर दिया गया था कि वो हाई स्कूल की पढ़ाई बीच में ही छोड़ दें, लेकिन रुद्रोजस ने पढ़ाई जारी रखने का फैसला लिया. इसके साथ ही उन्होंने अपनी AI कंपनी, 'एवियन' (Evion) पर और ज्यादा काम करना शुरू कर दिया. उनके इसी एआई स्टार्टअप की वजह से एक कंपनी ने उन्हें बड़ा ऑफर दिया था.
किसानों की करते हैं मदद
रुद्रोजस एआई स्टार्टअप 'एवियन' के फाउंडर हैं. ये एक AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आधारित प्लेटफॉर्म है जो साधारण ड्रोन तस्वीरों के जरिए खेतों और फसलों की सेहत पर नजर रखने में किसानों की मदद करता है. इससे खेतों को तस्वीर के जरिए दो रंगों में बांटा जाता है, एक हरा और दूसरा लाल रंग होता है. इससे किसानों को पता चलता है कि किस हिस्से में पानी, खाद या खास देखभाल की जरूरत है. इससे फसल अच्छी होती है और पैसे की बर्बादी भी बच जाती है. किसान सिर्फ उसी हिस्से पर छिड़काव करते हैं, जहां इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है.
स्कूल में ही आया आइडिया
रुद्रोजस के मुताबिक 'एवियन' का आइडिया उन्हें तब आया जब वे मैरीलैंड के पूल्सविले हाई स्कूल में पढ़ रहे थे. इस दौरान उनकी मुलाकात कुछ किसानों से हुई थी. उनसे बातचीत करने पर रुद्रोजस को पता चला कि किसान फसलों की बीमारियों या शुरुआती परेशानियों को पहचानने में काफी मुश्किलों का सामना करते हैं. इसीलिए उन्होंने इसका इलाज खोज निकाला और आज लाखों किसानों की जिंदगी आसान कर रहे हैं.
आज उनकी ये टेक्नोलॉजी साउथ अमेरिका, दक्षिण-पूर्व एशिया और भारत के किसानों की मदद कर रही है. इससे फसलों की पैदावार बढ़ रही है और संसाधनों (जैसे पानी और खाद) का सही उपयोग हो रहा है.
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