NEET-JEE में टॉप, लेकिन बोर्ड रिजल्ट में फिसड्डी; आखिर क्या है कोटा फैक्ट्री की इनसाइड स्टोरी?

Rajasthan Board Result Kota Passing Percentage: कोचिंग हब के नाम से मशहूर कोटा का रिजल्ट एक बार फिर खराब रहा है. बोर्ड परीक्षाओं में कोटा जिले का रिजल्ट हर बार ठीक नहीं रहता है. अब हर कोई इसके पीछे की वजह जानना चाहता है.

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Rajasthan Board Result Kota Passing Percentage

Rajasthan Board Result Kota: राजस्थान बोर्ड परीक्षाओं का रिजल्ट जब भी जारी होता है तो सबसे ज्यादा चर्चा कोटा की होती है, अब आप सोच रहे होंगे कि कोचिंग हब कोटा सबसे बेहतर प्रदर्शन के लिए चर्चा में रहता होगा, लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है. हर बार की तरह इस बार भी 10वीं बोर्ड परीक्षा के रिजल्ट में कोटा फिसड्डी साबित हुआ है. कोटा में पास होने वाले छात्रों की संख्या बाकी जिलों की तुलना में काफी कम है. अब सवाल ये है कि NEET-JEE और यूपीएससी में हमेशा आगे रहने वाला कोटा, आखिर बोर्ड परीक्षाओं में क्यों पिछड़ जाता है? आज हम आपको इसकी इनसाइड स्टोरी बताएंगे. 

हड़ौती संभाग के चारों जिले फिसड्डी

माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की तरफ से जारी 10वीं परीक्षा परिणाम में शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के गृह संभाग हाड़ौती के चारों जिले राज्य के 41 जिलों में सबसे निचले पायदान पर रहे. 89.25% परिणाम के साथ कोटा 39वें, 89.72% के साथ बारां 38वें, 89.94% के साथ झालावाड़ 37वें और 90.21% के साथ बूंदी 36वें स्थान पर रहा. 

कोटा का लगातार खराब प्रदर्शन

बोर्ड रिजल्ट में कोटा जिले का प्रदर्शन इस साल भी नहीं सुधरा और वह लगातार दूसरे साल 39वें स्थान पर ही बना रहा. तुलना करें तो कोटा से नीचे केवल प्रतापगढ़ (40वां) और धौलपुर (41वां) जिले ही रहे. इस तरह कोटा 41 जिलों में नीचे से तीसरे स्थान पर रहा. कोटा के रिजल्ट में इस साल मामूली बढ़ोतरी (1.35%) दर्ज जरूर हुई, लेकिन बाकी जिलों की तुलना में कोटा पिछड़ा ही रहा. 

क्या है कोचिंग हब कोटा के पिछड़ने की वजह?

अब लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि जिस कोटा में भारत के सबसे बेहतरीन टैलेंट रहते हैं, वो बोर्ड रिजल्ट में लगातार क्यों पिछड़ रहा है. इसका कारण कोटा का कोचिंग कल्चर ही है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि कोटा जैसे कोचिंग हब में स्कूल शिक्षा का महत्व लगातार कम होता जा रहा है. 
संपन्न परिवारों की पहली पसंद सीबीएसई के प्राइवेट स्कूल बनते जा रहे हैं, जबकि राजस्थान बोर्ड से जुड़े सरकारी और हिंदी माध्यम स्कूलों में अधिकतर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्र पढ़ते हैं. इससे बोर्ड रिजल्ट पर सीधा असर पड़ता है. यानी जो कोटा की क्रीमी लेयर है, वो उन स्कूलों में पढ़ती ही नहीं है, जिनका रिजल्ट सरकार की तरफ से जारी किया जाता है. 

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टीचर्स की कमी भी बड़ा कारण 

सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी भी रिजल्ट खराब होने का बड़ा कारण है. जानकारों का कहना है कि राजस्थान बोर्ड के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी और उन्हें अशैक्षणिक कार्यों में लगा दिया जाना भी एक वजह है. इससे स्कूलों में पढ़ाई का माहौल प्रभावित होता है और इसका असर सीधे परीक्षा परिणाम पर दिखाई देता है. फिलहाल शिक्षा मंत्री के गृह संभाग में शामिल जिलों के खराब प्रदर्शन पर सवाल उठ रहे हैं. आने वाले समय में यह मुद्दा शिक्षा विभाग और सरकार दोनों के लिए राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चा का विषय बन सकता है. 

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