Delhi News: प्राइवेट स्कूलों की मनमानी और हर साल महंगी किताबें खरीदने के दबाव पर अब लगाम लगने वाली है. मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने साफ कर दिया है कि स्कूल चाहे सरकारी हो या प्राइवेट, बच्चों के साथ अकादमिक भेदभाव (Academic Discrimination) नहीं चलेगा. प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने देशभर से मिली शिकायतों के बाद सभी राज्य सरकारों और शिक्षा मंत्रालय को नोटिस जारी कर 30 दिन में रिपोर्ट मांगी है. आयोग ने यह कार्रवाई 'नमो फाउंडेशन' द्वारा दी गई शिकायत के आधार पर की है.
महंगी किताबों से मिलेगी आजादी
अक्सर देखा जाता है कि प्राइवेट स्कूल जानबूझकर प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबें लगवाते हैं, जो NCERT के मुकाबले 10 गुना तक महंगी होती हैं. अब आयोग ने कहा है कि कक्षा 8 तक NCERT/SCERT की किताबें ही पढ़ाई जाएं. यानी अब आपको किताबों के नाम पर हजारों रुपये लुटाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. आयोग ने शिक्षा मंत्रालय से भी पूछा है कि कक्षा 8 तक का सिलेबस, तय सरकारी मानकों से अलग क्यों है?
बच्चे के कंधे से घटेगा बोझ
इतना ही नहीं, आयोग ने 'नेशनल स्कूल बैग पॉलिसी 2020' को सख्ती से लागू करने को कहा है. इसका सीधा मतलब है कि आपके बच्चे के स्कूल बैग का वजन अब कम होगा. शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) की धारा 29 का हवाला देते हुए आयोग ने साफ किया कि ज्यादा किताबें और भारी बोझ लादने वाले स्कूलों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए.
मनमर्जी की 'बुकलिस्ट' पर रोक
अब स्कूल अपनी मर्जी से कोई भी किताब नहीं थोप पाएंगे. प्रशासन 30 दिनों के भीतर हर स्कूल का ऑडिट करेगा. अगर किसी स्कूल में NCERT के अलावा दूसरी किताबें मिलीं, तो स्कूल को जवाब देना होगा.
आयोग ने राज्यों से क्या-क्या पूछा है?
आयोग ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को नोटिस भेजकर ये 3 मुख्य जानकारियां मांगी हैं:-
- क्या आपके जिले के शिक्षा अधिकारियों ने स्कूलों को NCERT किताबें पढ़ाने का आदेश दिया है?
- अगर नहीं दिया, तो तुरंत आदेश जारी करें और स्कूलों की लिस्ट चेक करें.
- 2025-26 के सत्र में कितने बच्चों ने प्राइवेट और सरकारी स्कूलों में एडमिशन लिया है और उनके लिए कितनी किताबें खरीदी गई हैं?
आयोग ने सख्त लहजे में कहा है कि जब सरकारी स्कूलों में NCERT चलती है, तो प्राइवेट स्कूलों में महंगी किताबें पढ़ाना एक तरह का भेदभाव है. शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत पाठ्यक्रम एक जैसा होना चाहिए. अगले 30 दिनों के अंदर सभी राज्य सरकारों को अपनी रिपोर्ट आयोग को भेजनी होगी.
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