अंके गौड़ा से लेकर कैलाश चंद्र पंत तक, एजुकेशन पर काम करने वाले इन लोगों को मिले पद्म पुरस्कार

Padma Awards For Education: शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले कई लोगों को पद्म पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है. इस लिस्ट में ओडिशा के चरण हेंबराम का नाम भी शामिल है, जो संथाली भाषा और पारंपरिक नृत्य को बचाए रखने का काम कर रहे हैं.

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शिक्षा के क्षेत्र में पद्म पुरस्कार

Padma Awards For Education: हर साल की तरह इस साल भी गणतंत्र दिवस से ठीक पहले पद्म पुरस्कारों का ऐलान हुआ है. समाज में अलग-अलग क्षेत्र में शानदार काम कर अपना योगदान देने वाले लोगों को ये प्रतिष्ठित पुरस्कार दिए जाते हैं. ये सिर्फ कोई मेडल या फिर उपाधि नहीं है, बल्कि ये उनकी पहचान और काम को दुनिया तक पहुंचाने का एक जरिया बन जाता है. इस बार 40 से ज्यादा लोगों का नाम इस लिस्ट में शामिल है, साथ ही वो लोग भी शामिल हैं, जिन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान दिया और लगातार इस पर काम कर रहे हैं. आइए जानते हैं कि एजुकेशन सेक्टर के लिए किन लोगों को पद्म पुरस्कार दिए गए हैं. 

अंके गौड़ा को पद्म श्री पुरस्कार

शिक्षा के क्षेत्र में शानदार काम करने के लिए कर्नाटक के अंके गौड़ा को भी पद्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया है. उन्हें पद्म श्री पुरस्कार दिया जाएगा. 75 साल के अंके गौड़ा ने अपना पूरा जीवन शिक्षा के क्षेत्र में काम करने के लिए लगा दिया. वो किताबों के काफी शौकीन हैं और यही वजह है कि अपनी जीवनभर की कमाई लगाकर उन्होंने एक ऐसी लाइब्रेरी तैयार कर ली, जहां ज्ञान का बड़ा भंडार है. इसका नाम उन्होंने 'पुस्तका माने' (Book House) रखा है. मैसूर के गांव हरलाहल्ली में मौजूद ये खास लाइब्रेरी हर किसी के लिए मुफ्त है. 

कैलाश चंद्र पंत 

मध्य प्रदेश के रहने वाले कैलाश चंद्र पंत को लिटरेचर और एजुकेशन के लिए पद्मश्री दिया गया है. पंत एक सीनियर जर्नलिस्ट थे और उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ने के बाद हिंदी भाषा को देशभर में नई पहचान दिलाने के लिए काम करना शुरू कर दिया. उन्होंने जनधर्म नाम की एक वीकली मैगजीन पब्लिश की. कैलाश चंद्र पंत ने भोपाल में हिंदी भवन और किसान भवन की भी शुरुआत की. 

ओडिशा के चरण हेंबराम (Charan Hembram)

ओडिशा के रहने वाले चरण हेंबराम को भी पद्मश्री से सम्मानित किया गया है. वो संथाली भाषा के लेखक और इस पर काम करने वाले लोगों की लिस्ट में सबसे ऊपर आते हैं. उन्होंने ओडिशा में कई संस्थान खोले हैं, जहां ट्राइबल कल्चरल एजुकेशन को बढ़ावा दिया जाता है और इसे सिखाया जाता है. पिछले करीब 30 सालों से वो ऐसे पारंपरिक नृत्य भी बच्चों को सिखा रहे हैं, जो लुप्त होने की कगार पर हैं. 

गंभीर सिंह योंजोन

पश्चिम बंगाल के गंभीर सिंह योंजोन को लिटरेचर और एजुकेशन के क्षेत्र में काम करने के लिए पद्मश्री दिया गया है. वो दार्जलिंग में पिछले करीब 40 से ज्यादा सालों से अकेडमिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम कर रहे हैं. साथ ही पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए कई तरह के काम करते हैं. उन्होंने लाइब्रेरी और हायर सेकेंडरी स्कूल के लिए अपनी जमीन दान कर दी. 

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