Iran War: 'वापस जाना मजबूरी, करियर हो जाएगा खत्म'... ईरान से लौटे कश्मीरी छात्र ने बताया युद्ध का कितना होगा असर

Iran Indian Students: ईरान से पढ़ाई बीच में छोड़कर भारत लौटने वाले छात्रों के करियर पर कितना असर पड़ने वाला है, इसे लेकर कश्मीर के छात्र फैजान ने एनडीटीवी से बातचीत की और बताया कि हालात ऐसे ही रहे तो क्या होगा.

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ईरान से लौटे छात्र ने बताया करियर पर कितना पड़ेगा असर

Iran Indian Students: अमेरिका और इजरायल के हमले के बाद से ही ईरान समेत मिडिल ईस्ट के तमाम देशों में हालात काफी खराब हैं. इसी बीच ईरान में रहने वाले दुनियाभर के लोग किसी तरह जान बचाकर अपने देश वापस लौट रहे हैं, जिनमें भारतीय भी शामिल हैं. ईरान में मेडिकल की पढ़ाई करने वाले छात्रों की संख्या काफी ज्यादा है, भारत समेत दुनियाभर से लोग ईरान पढ़ने आते हैं. इसी बीच कुछ भारतीय छात्रों का एक दल भारत लौटा है. इनसे कुछ हफ्ते पहले भारत लौटे कश्मीरी छात्र फैजान नबी से हमने बातचीत की और जाना कि आखिर ईरान में छात्रों के लिए कैसे हालात हैं. साथ ही हमने कश्मीरी छात्र से ये भी पूछा कि इससे उनके करियर पर कितना असर पड़ने वाला है. 

MBBS करने ईरान गए थे फैजान

कश्मीर के बडगाम के रहने वाले फैजान ने बताया कि वो मेडिकल की पढ़ाई के लिए ईरान गए थे. वो फरवरी के महीने में ही ईरान से भारत लौटे थे, लेकिन अब हालात ऐसे हैं कि वापस नहीं जा सकते हैं. जब हमने उनसे ईरान जाने का कारण पूछा तो उन्होंने कहा, भारत में NEET परीक्षा आयोजित होती है, जिसमें सीट काफी लिमिटेड होती हैं. आपको मनचाहा कॉलेज नहीं मिल पाता है, जिससे काफी दिक्कत होती है. छात्र ईरान इसलिए जाते हैं क्योंकि यहां मेडिकल की पढ़ाई काफी बेहतर है. यहां से ली गई डिग्री दुनियाभर में मान्य है. 

फैजान ने बताया कि ईरान पढ़ने जाने का दूसरा कारण कम फीस है. उन्होंने कहा, पूरे कोर्स के लिए मेरी कुल फीस 7 लाख रुपये है. मेरा एडमिशन स्कॉलरशिप के बेसिस पर हुआ था. इसके अलावा इतना ही पैसा रहने और खाने में भी लग जाता है. 

ईरान वापस जाना मजबूरी

कश्मीरी छात्र फैजान ने बताया कि वो अपना कोर्स बीच में ही छोड़कर आए हैं. ईरान में मार्च के महीने में नवरोज की छुट्टियां पड़ती हैं, इस दौरान ज्यादातर छात्र घर लौट जाते हैं. इसी बीच ईरान के हालात काफी बिगड़ गए हैं, लेकिन कोर्स पूरा करने के लिए छात्रों को वापस लौटना होगा. फैजान ने कहा कि इस तरह के हालात में छात्रों के पास कोई विकल्प नहीं है. भारत के नेशनल मेडिकल काउंसिल ने इसे लेकर सख्त नियम बनाए हैं, आपने जिस यूनिवर्सिटी में एडमिशन लिया है, उसी यूनिवर्सिटी से उसे पूरा करना है. 

फैजान ने कहा कि अगर नेशनल मेडिकल काउंसिल एक बार के लिए इस बात की इजाजत देता है कि ईरान में पढ़ने वाले छात्र दूसरे देशों में माइग्रेट कर सकते हैं तो मुझे लगता है कि 80 फीसदी छात्र इसके लिए राजी हो जाएंगे. हालांकि ऐसा होना लगभग नामुमकिन है. 

करियर पर पड़ेगा असर  

ईरान से पढ़ाई बीच में छोड़कर भारत लौटने वाले छात्रों के करियर पर भी इस युद्ध का असर पड़ सकता है. इस पर फैजान ने कहा, जब इजरायल और ईरान के बीच पहले हालात बिगड़े थे तो ये करीब 12 दिन में ठीक हो गया. इस बार लग रहा है कि ये काफी लंबा चलेगा. अगर नवरोज की छुट्टियों तक ये हालात ठीक नहीं होते हैं तो हमारे करियर पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है. इससे हमारा खर्चा भी बढ़ जाएगा और परिवार की भी टेंशन बढ़ने लगेगी. हमारे दिमाग में सिर्फ यही चल रहा है कि आगे क्या होगा, क्या हम ईरान वापस जा पाएंगे या नहीं. 

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ईरान में कैसी है हायर एजुकेशन 

फैजान ने बताया कि ईरान के पास वर्ल्ड क्लास लैब्स हैं, दुनिया के बेस्ट डॉक्टर यहां हैं और बहुत अच्छी पढ़ाई कराई जाती है. यहां की यूनिवर्सिटीज में दुनिया के बेस्ट इंटेलिजेंट लोग हैं. हालांकि जैसे हालात बन रहे हैं, उससे हम किसी भी भारतीय छात्र को वहां पढ़ने की सलाह नहीं देंगे. अगर आपको मेडिकल की पढ़ाई के लिए विदेश जाना है तो आप कजाकिस्तान, तजाकिस्तान और किर्गिजस्तान जैसे देशों में जा सकते हैं. यहां हमेशा शांति रहती है और पढ़ाई भी अच्छी है. 

विदेश में पढ़ाई के बाद भारत लौटेंगे?

जब हमने फैजान से पूछा कि आप और आपके साथ ईरान में पढ़ने वाले युवा क्या पढ़ाई पूरी होने के बाद भारत लौटकर काम करेंगे? इस पर उन्होंने कहा कि ईरान में कोई काम नहीं करना चाहता है, क्योंकि यहां सैलरी काफी कम मिलती है. जो भी पढ़ने के लिए किसी देश में जाते हैं तो वो विदेश में ही नौकरी करना पसंद करते हैं. मुझे लगता है कि विदेश में 5-6 साल नौकरी करके एक्पोजर लेकर फिर भारत लौटना सही है. 

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