- दिल्ली पुलिस में 9 सितंबर 2026 को पांच आईपीएस अधिकारियों के तबादले और अतिरिक्त जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं
- आईपीएस ईशा सिंह को डीसीपी वेलफेयर के साथ लीगल सेल की भी अतिरिक्त जिम्मेदारी मिली है
- ईशा सिंह यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2020 में अखिल भारतीय स्तर पर 191वीं रैंक हासिल कर आईपीएस बनीं
दिल्ली पुलिस में 9 सितंबर 2026 को पांच भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारियों के तबादले किए गए तथा उन्हें अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है. साल 2021 बैच की आईपीएस ईशा सिंह को दिल्ली पुलिस में डीसीपी वेलफेयर के साथ-साथ अब लीगल सेल की भी अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है.
ईशा सिंह वह तेज-तर्रार आईपीएस अधिकारी हैं, जिन्होंने अपने 1985 बैच के आईपीएस पिता योगेश प्रताप (वाईपी) सिंह की ईमानदारी पर सवाल उठते, उनका 10 साल का संघर्ष और अंत में उनकी पुलिस की नौकरी जाते देखा है. ईशा सिंह ने पहले कानून की पढ़ाई की. बॉम्बे हाईकोर्ट में वकालत की और फिर पिता की तरह आईपीएस अधिकारी बनीं.
एजीएमयूटी कैडर की 75 आरआर की आईपीएस (पी) ईशा सिंह ने ट्रेनिंग के दौरान एनएफएसयू ट्रॉफी भी जीती.
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एनएफएसयू ट्रॉफी अपने नाम की
यूपीएससी क्रैक करने के बाद ईशा सिंह को एजीएमयूटी सर्विस कैडर अलॉट हुआ है. तेलंगाना के सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी में ट्रेनिंग के दौरान एजीएमयूटी कैडर की 75 आरआर की आईपीएस (पी) ईशा सिंह और 75 आरआर के आईपीएस (पी) मदन सी ने पुलिस विज्ञान के लिए राष्ट्रीय फोरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी (एनएफएसयू) ट्रॉफी जीती थी. तस्वीरें SVPNPA ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शेयर की थी.
आईपीएस ईशा सिंह की सफलता की कहानी
संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा पास करने पर ईशा सिंह ने लिंक्डइन प्रोफाइल पर अपनी सफलता की कहानी साझा की थी. आइए जानते हैं ईशा सिंह की कहानी, उन्हीं की जुबानी.
"मुझे यह शेयर करते हुए बहुत खुशी हो रही है कि मैंने संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा 2020 में अखिल भारतीय स्तर पर 191वीं रैंक हासिल करके भारतीय पुलिस सेवा के लिए क्वालीफाई कर लिया है. देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाना हमेशा से मेरा सपना रहा है. मेरा दृढ़ विश्वास है कि हमारे पास एक मानवीय, करुणामय और सामाजिक रूप से जिम्मेदार वैश्विक लीडर बनने की क्षमता और प्रेरणा है."
ईशा सिंह अपने परिवार में दादा व पिता के बाद तीसरी आईपीएस अधिकारी हैं. Photo Credit: Isha Singh Instagram
ईशा सिंह के दादा व पिता भी रहे आईपीएस अफसर
"मैं अपने परिवार में आईपीएस अधिकारी बनने वाली तीसरी पीढ़ी हूं. मुझसे पहले मेरे स्वर्गीय दादाजी श्री आर.बी. सिंह और मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी प्रेरणा, मेरे पिता श्री वाई.पी. सिंह इस सेवा में रहे. मेरे पिता सबसे ईमानदार और निडर अधिकारियों में से एक रहे हैं. वे सीबीआई में थे और देश की जनता के प्रति इतने समर्पित थे कि उन्होंने 1990 के दशक में हुए कुछ सबसे बड़े घोटालों का बिना किसी डर के पर्दाफाश किया."
"अपनी ईमानदारी की वजह से सिस्टम से मिले नुकसान और विरोध के बावजूद उन्हें आज तक पेंशन भी नहीं मिली है. वे अपने सिद्धांतों और प्रतिबद्धता पर अडिग रहे. जब 2004 में उन्होंने इस्तीफा देकर मुझे इस बारे में बताया, तब मैं महज साढ़े आठ साल की थी. उसी वक्त मैंने यह संकल्प लिया था कि मैं उनकी इस जंग को आगे बढ़ाऊंगी, क्योंकि हमारे सिस्टम को उनके जैसे ईमानदार अधिकारियों की सख्त जरूरत है. यही एकमात्र वजह थी कि मैंने यूपीएससी की परीक्षा दी."
IPS बनने के बाद ईशा सिंह ने लिंक्डइन प्रोफाइल पर अपनी सफलता की कहानी साझा की थी Photo Credit: Isha Singh Instagram
मां आभा सिंह भी केंद्रीय सेवा में रहीं अधिकारी
"मेरी जिंदगी की दूसरी प्रेरणा मेरी मां आभा सिंह हैं, जो केंद्रीय सेवा में थीं और बाद में बेजुबानों की आवाज बनने के लिए वीआरएस लेकर वकील बन गईं. उन्होंने मुझे हमेशा समाज को लौटाना और सबसे बढ़कर एक अच्छा इंसान बनना सिखाया है. वकालत के पेशे में उनकी उत्कृष्टता और लोगों के लिए उनका काम मुझे बेहद प्रेरित करता है. मैं खुद को बहुत खुशकिस्मत मानती हूं कि मैंने इतनी अद्भुत इच्छाशक्ति वाली मां के घर जन्म लिया."
"'आभा सिंह लॉ ऑफिस' में एक वकील के तौर पर काम करने का अनुभव भी शानदार रहा है. मैंने करीब से देखा है कि जब हम अपने पेशे की जिम्मेदारी को समझते हैं, तो कितना बड़ा बदलाव ला सकते हैं! सफाई कर्मचारियों और घरेलू कामगारों के लिए काम करना, पुलिस द्वारा की गई अवैध गिरफ्तारियों को चुनौती देना, हाशिए पर मौजूद उन विचाराधीन कैदियों का प्रतिनिधित्व करना जिनके पास वकील नहीं हैं, कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाने पर गलत तरीके से निकाली गई महिलाओं के हक में लड़ना और संविधान का उल्लंघन करने वाले इंटरनेट नियमों को चुनौती देना जैसी चीज़ों ने मुझे काले कोट की ताकत का अहसास कराया है."
आईपीएस ईशा सिंंह के दादा आर.बी. सिंह और पिता वाईपी सिंंह निडर पुलिस अधिकारी रहे हैं. Photo Credit: Isha Singh Instagram
पिता ने आईपीएस की नौकरी छोड़ शुरू की थी वकालत
ईशा सिंह ने 'जोश टॉक्स' पर अपनी सफलता की कहानी साझा करते हुए बताया था कि वे मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं. 1993 में उनके पिता की पोस्टिंग एसपी, सीबीआई (मुंबई) के पद पर थी. इस दौरान पिता की ईमानदारी पर सवाल उठे. उन्होंने करीब 10 साल संघर्ष किया और फिर भारतीय पुलिस सेवा की नौकरी छोड़कर वकालत शुरू कर दी. पिता के साथ यह सब होता देख ही ईशा सिंह ने तय कर लिया था कि वे आईपीएस बनकर इस सिस्टम की कमियों को दूर करेंगी.
पुडुचेरी में ईशा सिंह की लेडी सिंघम वाली छवि
यूपीएससी 2020 क्रैक करने के बाद ईशा सिंह अरुणाचल प्रदेश-गोवा-मिजोरम और केंद्र शासित प्रदेश (एजीएमयूटी) कैडर में आईपीएस बनीं. पुडुचेरी में तैनाती के दौरान उस वक्त आईपीएस ईशा सिंह का लेडी सिंघम रूप देखने को मिला जब 9 दिसंबर 2025 को एक राजनीतिक रैली के दौरान बेकाबू भीड़ को कंट्रोल करते टीवीके के नेता बुस्सी आनंद के सामने वे डटकर खड़ी हो गई थीं. फिर इसी साल जनवरी में ईशा सिंह समेत सात आईपीएस अधिकारियों को दिल्ली में तैनाती दी गई थी.
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दिल्ली पुलिस में आईपीएस अधिकारियों के तबादले
आईपीएस ईशा सिंह के साथ जिन चार अन्य आईपीएस अधिकारियों के तबादले किए गए हैं एवं नई जिम्मेदारी दी गई है. 2008 बैच के चिन्मय बिस्वाल को संयुक्त पुलिस आयुक्त (ऑपरेशन्स) के साथ आईएफएसओ का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है. 2010 बैच के आईपीएस ईश सिंघल को अपर पुलिस आयुक्त, आर्थिक अपराध शाखा के पद पर तैनात किया गया है. 2010 बैच के ही दिनेश कुमार गुप्ता अपर पुलिस आयुक्त (दिल्ली पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड) को अपर पुलिस आयुक्त (यातायात) की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है. इनके अलावा 2013 बैच के आईपीएस विकास कुमार को उप-पुलिस आयुक्त (यातायात) के पद पर तैनाती मिली है.
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