पढ़ाई के लिए विदेश जाने वाले छात्रों में हजारों भारतीय छात्र भी शामिल होते हैं. इनमें से ज्यादातर छात्रों का सपना होता है कि वो अमेरिका और रूस जैसे देशों में जाकर पढ़ाई करें. यहां मौजूद बड़ी यूनिवर्सिटीज उन्हें स्कॉलरशिप भी देती हैं. हालांकि रूस से अब भारतीय छात्र दूरी बना रहे हैं, वहीं पेरेंट्स भी अपने बच्चों को यहां भेजने से कतरा रहे हैं. विदेश मंत्रालय ने हाल ही में एक आंकड़ा जारी किया है, जिसमें बताया गया कि विदेशों में रहने वाले भारतीय छात्रों की सबसे ज्यादा शिकायतें रूस से आई हैं. पिछले कुछ सालों में भारतीय छात्रों के खिलाफ हमले बढ़े हैं, जिसने उन्हें दूसरे देशों की तरफ जाने पर मजबूर किया है.
भारतीय युवाओं के खिलाफ अपराध
रूस और यूक्रेन का युद्ध पिछले कई सालों से लगातार चल रहा है. इसी बीच ऐसी खबरें भी सामने आईं कि जबरन युवाओं और छात्रों को सेना में भर्ती करवाया जा रहा है. इसमें भारत के भी कुछ युवा शामिल थे. इसी बीच विदेश मंत्रालय (MEA) के ताजा आंकड़ों में बताया गया है कि शोषण और नस्लीय भेदभाव की कुल शिकायतों में से 50% से ज्यादा अकेले रूस से आई हैं.
क्यों हो रहे हैं भारतीय छात्रों पर हमले
रूस में भारतीय छात्रों के खिलाफ नफरत और हमले की कई वजह हैं. इनमें एशियन देशों के छात्रों को देखकर भेदभाव, मानसिक उत्पीड़न, निकालने की धमकी और नस्लीय हिंसा शामिल है. रिपोर्ट्स के मुताबिक छात्रों का कहना है कि यूनिवर्सिटी प्रशासन की तरफ से भी उनके साथ भेदभाव किया जाता है और छोटी सी बात पर निकालने की धमकी दी जाती है. ऐसे में मारपीट की शिकायत करने से भी छात्र डरते हैं.
रूस में कितने भारतीय छात्र?
भारत से रूस जाने वाले छात्रों की संख्या काफी ज्यादा है. पिछले साल के आंकड़ों की बात करें तो 2025 में कुल 27,222 भारतीय छात्रों ने रूस के तमाम संस्थानों में एडमिशन लिया. वहीं इससे पिछले साल यानी 2024 में ये आंकड़ा 31 हजार से भी ज्यादा था.
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