Delhi Private School Fees Dispute: दिल्ली के मयूर विहार इलाके से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है. यहां के एक नामी प्राइवेट स्कूल ने फीस न भरने की वजह से 12वीं क्लास के चार छात्रों का नाम स्कूल से काट दिया है. स्कूल की बढ़ी हुई फीस न देने पर चारों छात्रों को 7 मार्च को नोटिस थमाया गया और 9 मार्च से उन्हें स्कूल आने से मना कर दिया, जिसके बाद मामला गरमा गया. आइए जानते हैं कि आखिर पूरा मामला क्या है और क्या कहता है नियम.
पूरा मामला क्या है
मयूर विहार के एक प्राइवेट स्कूल में चारों बच्चे 11वीं पास कर 12वीं में पहुंचे थे. हाल ही में स्कूल ने फीस में इजाफा किया था, जिसे देने से माता-पिता ने इनकार कर दिया. विवाद बढ़ा तो स्कूल ने कड़ा रुख अपनाते हुए 7 मार्च को एक नोटिस जारी कर दिया. नोटिस में कहा गया कि अगर बकाया फीस जमा नहीं की गई, तो 9 मार्च से बच्चों का नाम काट दिया जाएगा और उन्हें स्कूल न भेजा जाए. स्कूल का तर्क है कि उनके पास फीस तय करने का अधिकार है और इसके लिए उन्हें शिक्षा विभाग (DoE) से मंजूरी लेने की जरूरत नहीं है.
क्या कहता है नियम
स्कूल ने इस कार्रवाई के लिए दिल्ली स्कूल एजुकेशन रूल्स, 1973 के 'रूल 35' का हवाला दिया है. इस नियम के तहत अगर कोई छात्र तय समय तक फीस जमा नहीं करता है, तो स्कूल के पास उसका नाम काटने का अधिकार होता है. स्कूल ने कोर्ट के पुराने फैसलों का जिक्र करते हुए कहा कि 'अन-एडेड' (जिन्हें सरकार से मदद नहीं मिलती) प्राइवेट स्कूलों को अपनी फीस तय करने के लिए डायरेक्टर ऑफ एजुकेशन से पहले पूछने की जरूरत नहीं है.
पेरेंट्स और स्कूल के बीच ठनी
बच्चों के पैरेंट्स का कहना है कि वे बढ़ी हुई फीस के खिलाफ थे, इसलिए उन्होंने भुगतान नहीं किया. वहीं, स्कूल का कहना है कि बिना बकाया चुकाए बच्चों को क्लास में बैठने की इजाजत नहीं दी जाएगी. फिलहाल इस मामले पर स्कूल की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन नोटिस ने अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है.
ऐसे मामलों में पैरेंट्स को क्या करना चाहिए
अगर आपके स्कूल में भी फीस को लेकर कोई विवाद है, तो सबसे पहले स्कूल मैनेजमेंट के साथ बैठकर समाधान निकालने की कोशिश करें. अगर आपको लगता है कि फीस नाजायज तरीके से बढ़ाई गई है, तो आप दिल्ली शिक्षा विभाग (DoE) में इसकी शिकायत कर सकते हैं. ऐसे करते समय हमेशा 'दिल्ली स्कूल एजुकेशन एक्ट' के नियमों पर नजर रखें, ताकि कोई स्कूल आपके अधिकारों का गलत फायदा न उठा सके.